Wednesday, 4 May 2016

मेरे छोटे भाई की वाइफ़

निशा मेरे छोटे भाई रुपम की वाइफ़ है। निशा काफ़ी सुंदर महिला है। उसका बदन ऊपरवाले ने काफ़ी तसल्ली से तराश कर बनाया है। मैं शिवम उसका जेठ हूं। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं। निशा शुरु से ही मुझे काफ़ी अच्छी लगती थी।

मुझसे वो काफ़ी खुली हुई थी। रुपम एक यूके बेस्ड कम्पनी में सर्विस करता था। हां बताना तो भूल ही गया निशा का मायका नागपुर में है और हम जालंधर में रहते हैं।

आज से कोई पांच साल पहले की बात है। हुआ यूं कि शादी के एक साल बाद ही निशा प्रिग्नेंट हो गयी। डिलीवरी के लिये वो अपने मायके गयी हुई थी। सात महीने में प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गयी। बच्चा शुरु से ही काफ़ी वीक था। दो हफ़्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गयी। रुपम तुरंत छुट्टी लेकरनागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था।

डिसाइड ये हुआ था कि निशा की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आयेगी। एक महीने के बाद जब निशा को वापस लाने की बात आयी तो रुपम को छुट्टी नहीं मिली।

निशा को लेने जाने के लिये रुपम ने मुझे कहा। सो मैं निशा को लेने ट्रैन से निकला। निशा को वैसे मैने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस यात्रा मे हम दोनो में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली निशा बेपर्दा हो गयी।

हमारी टिकट 1st class में बुक थी। चार सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रैन में चढ़ गये। गरमी के दिन थे। जब तक ट्रैन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी। मगर दूसरों के आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा, अब प चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।" मैं उसकी बात पर हँस पड़ा।

"मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।" मैने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया। अचानक मेरे मुंह से निकला "अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुश्न छिपा है उसका पता कैसे लगता।" उसने मेरी ओर देखा फ़िर शर्म से लाल हो गयी। उसने बोतल ग्रीन रंग की एक शिफ़ोन की साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था। गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया। तब मैने जाना कि उसने ब्लाउज़ के अन्दर ब्रा नही पहनी हुई है। उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिये काफ़ी बड़े बड़े हो गये थे। ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिये उसकी आधी छातियां साफ़ दिख रही थी। पतले ब्लाउज़ में से ब्रा नहीं होने के कारण निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ़ नजर आ रहा था। मेरी नजर उसकी छाती से चिपक गयी। उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूब को देखता पाकर शर्मा
गयी और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया। हम दोनो बातें करते हुए जा रहे थे।

कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गयी। कुछ देर बाद लौट कर आयी तो उसका चेहरा थोड़ा गम्भीर था। हम वापस बात करने लगे। कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौट कर आ गयी। मैने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने हाथो से अपने ब्रेस्ट को हलके से दबा रही है।

"कोई प्रोब्लम है क्या?' मैने पूछा।

"न।।नहीं" मैने उसे असमंजस में देखा। कुछ देर बाद वो फिर उठी तो मैने कहा "मुझे बताओ न क्या प्रोब्लम है?"

वो झिझकती हुई सी खड़ी रही। फ़िर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी। कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गयी।"मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।" उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैने देखा उसकी आंखें आंसु से छलक रही हैं।"क्यों क्या हुआ" मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं। मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया।"जी वो क्या है म्म वो मेरी छातियां भारी हो रही हैं।" वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाये आखिर मैं उसका जेठ था।" म्मम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।"

उसने नजरें नीची करते हुए कहा।"बाथरूम जाना है?" मैने पूछा"गयी थी लेकिन वाश-वेसिन बहुत गंदा है इसलिये मैं वापस चली अयी" उसने कहा "और बाहर के वाश-वेसिन में मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा?" "फ़िर क्या किया जाए?" मैं सोचने लगा "कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फ़र्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई बर्तन भी नही है जिसमें दूध निकाल सको"उसने झिझकते हुये फ़िर मेरी तरफ़ एक नजर डाल कर अपनी नजरें झुका ली। वो अपने पैर के नखूनों को कुरेदती हुई बोली, "अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं?""बोलो""आप इन्हें खाली कर दीजिये न""मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं।" मैने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा।"आप अगर इस दूध को पीलो……"उसने आगे कुछ नहीं कहा।

मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया।"लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं""जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है।?" उसने मुझसे कहा "मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो। प्लीज़।"मैं चुप चाप बैठा रहा समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल मुंह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी। उसने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिये।"प्लीज़" उसने फ़िर कहा
लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला।"जाइये आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप अपने रूढ़ीवादी विचारों से घिरे बैठे रहिये चाहे मैं दर्द से मर ही जाउं।" कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से
उसके मुंह से चीख निकल गयी "आआह्हह्ह" ।मैने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज़ से बाहर निकाल दिये। फ़िर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया। उसने मेरी तरफ़ देखा। मैं अपनी सीट से उठ कर केबिन के दरवाजे को लोक किया और उसके बगल में आ गया। उसने अपने ब्लाउज़ को उतार दिया। उसके नग्न ब्रेस्ट जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थी मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिये बेताब थे। मैने अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फ़ेरते हुए निप्पल के ऊपर लाया। मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके निप्पल अंगूर की साइज़ के हो गये। मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने स्तन को नीचे झुकाया। उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था।

मैने जीभ निकाल कर उसके निप्पल को छूआ।"ऊओफ़्फ़फ़्फ़ जेठजी अब मत सताओ। पलेअसे इनका रस चूस लो।" कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया। मैने अपने होंठ खोल कर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा। मीठे दूध की एकतेज़ धार से मेरा मुंह भर गया। मैने उसकी आंखों में देखा। उसकी आंखों में शर्म की परछाई तैर रही थी। मैने मुंह में भरे दूध को एक घूंठ में अपने गले के नीचे उतार दिया।"आआअह्हह्हह" उसने अपने सिर को एक झटका दिया।मैने फ़िर उसके निप्पल को जोर से चूसा और एक घूंठ दूध पिया। मैं उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा।"ऊओह्हह ह्हह्हाआन्न हाआन्नन जोर से चूसो और जोर से। प्लीज़ मेरे निप्पल को दांतों से दबाओ। काफ़ी खुजली हो रही है।"

उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फ़ेर रही थी। मैने दांतों से उसके निप्पल को जोर से दबाया।"ऊउईईइ" कर उठी। वो अपने ब्रेस्ट को मेरे चेहरे पर दबा रही थी। उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़ कर मेरे शर्ट के अन्दर घुस गये। वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फ़ेरने लगी। फ़िर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा। "क्या कर रही हो?" मैने उससे पूछा।"वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ" उसने कहा"क्या कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ" मैने उसे छेड़ा"दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीवी के स्तनों से""काफ़ी मीठा है""धत" कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिये और मेरे चेहरे पर झुक गयी। इससे उसका निप्पल मेरे मुंह से निकल गया। उसने झुक कर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ़ किया। फ़िर वो अपने हाथों से वापस अपने निप्पल को मेरे लिप्स पर रख दी। मैने मुंह को काफ़ी खोल कर निप्पल के साथ उसके बूब का एक पोर्शन भी मुंह में भर लिया। वापस उसके दूध को चूसने लगा। कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया।"अब दूसरा"मैने उसके स्तन को मुंह से निकाल दिया फ़िर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस स्तन को पीने लगा। उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फ़िर रहे थे। हम दोनो ही उत्तेजित हो गये थे। उसने अपना हाथ अगे बढ़ा कर मेरे पैंट की ज़िप पर रख दिया। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। फ़िर उसे अपने हाथों से दबा कर उसके साइज़ का जायजा लिया।"काफ़ी तन रहा है" उसने शर्माते हुए कहा।"तुम्हारी जैसी हूर पास इस अन्दाज में बैठी हो तो एक बार तो
विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाये।""म्मम्म अच्छा। और आप? आपके क्या हाल हैं" उसने मेरे ज़िप की चैन को खोलते हुए पूछा"तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है" उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अन्दर कर ब्रीफ़ को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा "देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में"मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुयी। "अरे बाप रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती है इसे?""आ जाओ तुम्हें भी दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है।""धत् मुझे नहीं देखना कुछ।

आप बड़े वो हो" उसने शर्मा कर कहा।लेकिन उससे हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की।"इसे एक बार किस तो करो" मैने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते हुए कहा। उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिये। अब तक उसका
दूसरा स्तन भी खाली हो गया था। उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से निप्पल
छूट गया। मैने उसके सिर को हलके से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर
मेरे लिंग को जगह दे दी। मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया। उसने दो तीन
बार मेरे लिंग को अन्दर बाहर किया फ़िर उसे अपने मुंह से निकाल लिया।"ऐसे
नहीं… ऐसे मजा नहीं आ रहा है""हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा
देना चाहिये" मैने अपने कपड़ों की तरफ़ इशारा किया। मैने उठकर अपने कपड़े
उतार दिये फ़िर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके
बदन से अलग कर दिया। अब हम दोनो बिल्कुल नग्न थे। तभी किसी ने दरवाजे पर
नोक किया। "कौन हो सकता है।" हम दोनो हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली
में भर लिये और निशा बर्थ पर सो गयी। मैने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल
दी। इस बीच दो बार नोक और हुअ। मैने दरवाजा खोला बाहर टीटी खड़ा था। उसने
अन्दर आकर टिकट चेक किया और कहा "ये दोनो सीट खाली रहेंगी इसलिये आप चाहें
तो अन्दर से लोक करके सो सकते हैं" और बाहर चला गया। मैने दरवाजा बंद किया
और निशा के बदन से चादर को हटा दिया। निशा शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को
और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी। मैने उसके हाथों को पकड़ कर
हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा "प्लीज़ मुझे शर्म आ रही
है।" मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा। इससे मेरा लिंग
उसके मुंह के ऊपर था। उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुंह
में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सट गये।
"आह विशाल जी
क्या कर रहे हो मेरा बदन जलने लगा है। पंकज ने कभी इस तरह मेरी योनि पर
अपनी जीभ नहीं डाली" उसके पैर छटपटा रहे थे। उसने अपनी टांगों को हवा में
उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी। मैं उसके
मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा। मेरे हाठ उसकी योनि की फ़ांकों को
अलग कर रखे थे और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी। वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह
में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी। काफ़ी देर तक इसी
तरह 69 पोज़िशन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनो एक
साथ खल्लास हो गये। उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था। उसके मुंह से चू
कर मेरा रस एकपतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके
बालों में जाकर खो रहा था। मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गयी।
हम दोनो एक दम नग्न थे और दोनो के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनो एक दूसरे
से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये मानो अब कभी भी न अलग
होने की कसम खा ली हो। कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते
रहे फ़िर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे।"अब आ जाओ" मैने निशा को
कहा।"जेठजी थोड़ा सम्भाल कर। अभी अंदर नाजुक है। आपका बहुत मोटा हैकहीं कोई
जख्म न हो जाये।""ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे
ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।"निशा उठकर बर्थ पर चौपाया
हो गयी। मैं पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हलका सा धक्का मारा।
गीली तो पहले ही हो रही थी। धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धंस
गया। एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफ़ी टाइट थी। वो दर्द से
"आआह्हह" कर उठी। मैं कुछ देर के लिये उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा। कुछ देर
बाद जब दर्द कम हुआ तो निशा ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड
पूरा अंदर चला जाये।"डालो न रुक क्यों गये।""मैने सोचा तुम्हें दर्द हो
रहा है इसलिये।""इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है
दर्द तो करेगा ही।" उसने कहा। फ़िर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी
कमर को आगे पीछे करने लगी। मैं पीछे से शुरु शुरु में सम्भल कर धक्का मार
रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के से
उसके दूध भरे स्तन उछल उछल जाते थे। मैने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके
स्तनो को अपने हाथों से थाम लिया। लेकिन मसला नहीं, नहीं तो सारी बर्थ
उसके दूध की धार से भीग जाती। काफ़ी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने
अपने सिर को को जोर जोर से झटकना चालू किया।"आआह्हह्ह शीईव्वव्वाअम्मम
आआअह्हह्ह तूउम्म इतनीए दिन कहा थीए। ऊऊओह्हह माआईईइ माअर्रर्रर जाऊऊं
गीइ। मुझीए माअर्रर्रर डालूऊओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लूऊ" और उसकी योनि में
रस की बौछार होने लगी। कुछ धक्के मारने के बाद मैने उसे चित लिटा दिया और
ऊपर से अब धक्के मारने लगा।"आअह मेरा गला सूख रहा है।" उसका मुंह खुला हुआ
था। और जीभ अंदर बाहर हो रही थी। मैने हाथ बढ़ा कर मिनरल वाटर की बोतल उठाई
और उसे दो घूंठ पानी पिलाया। उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस
किया।"चोदो शिवम चोदो। जी भर कर चोदो मुझे।" मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा।
काफ़ी देर तक धक्के लगाने के बाद मैने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि
से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।"आजा मेरे उपर" मैने
निशा को कहा। निशा उठ कर मेरे बर्थ पर आ गयी और अपने घुटने मेरी कमर के
दोनो ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर सेट करके धीरे धीरे मेरे लिंग पर
बैठ गयी। अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी। मैने उसके निप्पल को पकड़ कर
अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गयी। मैने उसके निप्पल को सेट कर के
दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी। अब वो मुझे चोद रही थी और मैं
उसका दूध निचोड़ रहा था। काफ़ी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी "शिवम मेरे
निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।" हम दोनो साथ
साथ झड़ गये। काफ़ी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लम्बी लम्बी सांसे लेती
रही। फ़िर जब कुछ नोर्मल हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गयी। हम दोनो
लगभग पूरे रास्ते नग्न एक दूसरे को प्यार करते रहे। लेकिन उसने दोबारा
मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया, उसके बच्चेदानी में हल्का हल्का दर्द हो
रहा था। लेकिन उसने मुझे आश्वासन दिया। "आज तो मैं आपको और नहीं दे सकुंगी
लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लुंगी अपने अंदर। और हां
अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनो भाईयों में से किसका बच्चा आता है।
उस यात्रा के दौरान कई बार मैने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ़ किया।

मेरी मामी

जब मैं गर्मी की छुट्टी में अपने नाना नानी के घर
गया था वहां मेरे मामा मामी रहते थे मेरी मामी मस्त माल थी हमेशा बड़े गले का
कुरता पहना करती थी उनको देख कर मेरा मन डगमगाता था ऐसा लगता था जैसे वो मुझे
अपनी ओर आकर्षित करती थी मैं बार बार उनके झुकने का इन्तज़ार करता रहता था।
मेरी मामी का नाम सोनिया है। मुझे जब भी लगता था कि वो झुकने वाली है तो मैं
सामने जाकर खड़ा हो जाता था और तिरछी नज़र से उनके बड़े बड़े गोरे गोरे और चिकने
चिकने बूब्स को देखा करता था मुझे उनके बूब्स बेहद पसन्द थे, मुझे उन्हे छूने
का बेहद मन करता था कभी कभी जान बूझ कर मैं उनसे सामने से जाकर टकरा जाता था
और बड़ी होशियारी से उनके बूब्स को छू लिया करता था। लेकिन इतने में मेरा मन
नहीं भरता था। मैं उन्हे सहलाना चाहता था वो बहुत गूरी है। उनको देख कर मुझे
उनको चूदने का मन करता था। वो बहुत गदराई हुई बदन की है मैं भी वैसा ही हूं।
एक दिन मेरे मामा को कुछ काम से 6 दिनो के लिये दुबई जाना पड़ा। मैं घर के हाल
में बैथा ही था तब मेरी मामी हाल में आयी और उन्होने मुझे एक चिट्ठी दी उस
चिट्ठी में लिखा था "मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं मुझे तुम्हे देखते ही कुछ
कुछ होता है मैं तुम्हारे साथ अकेले में कुछ वक्त गुज़ारना चाहती हूं ये बात
मैं ने चिट्ठी में इसलिये कहीं क्योंकि मुझे शरम आ रही थी अगर तुम मुझसे
मिलोगे तो आज रात 11.00 बजे मेरे कमरे में आ जाना और तुम्हारी ओर से हां है
तो चिट्ठी मुझे वापस लौटा देना मैं तुम्हारा इन्तज़ार करुंगी"। ये पढ़ कर तो
मेरा मन ही उछल पड़ा, मैं ने तुरन्त वो चिट्ठी उनको वापस लौता दी और 11 बजने
का इन्तज़ार करने लगा।

रात हो चुकी है 11 बज रहे है मैं कमरे में चला गया कमरे के अन्दर घुसते ही
मैं ने देखा कि मेरी मामी काले रंग की नाइटी पहनी हुई थी उन्हे देख कर ऐसा लग
रहा था कि उन्होने अंदर कुछ भी नहीं पहना है। उनके बड़े बड़े बूब्स मुझे दिख
रहे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं शुरुआत कहां से करुं। तभी अचानक मेरी
मामी ने मेरा हाथ पकड़ लिया ये उस हसीन रात की शुरुआत थी। मैने भी मामी की कमर
को पकड़ के अपनी ओर खींच लिया और उन्हे चूमने लगा। उनके गालों को चूमते चूमते
मैं उनके होंठों तक पहुंच गया। जब मैने देखा कि मेरी मामी मेरे चुम्मो का
आनंद ले रही है तो मैने अपना हाथ उनके बूब्स पर रख दिया। मेरे हाथों ने जैसे
ही उनकी चूचियों को छुआ वो कांप सी गयी मुझे उनके बूब्स छूने में बहुत मज़ा आ
रहा था। वो बहुत नरम थे तभी मैने उनकी नाइटी को उनके कंधे से नीचे उतार दिया
उनके चिकने बूब्स अब पुरी तरह से मेरे हाथ में थे मैने अपनी उंगलियों से उनके
गुलाबी निप्पल को रगड़ना शुरु किया तो वो काफ़ी उत्सुक हो गयी और मेरे लंड को
कस कर पकड़ लिया। मैं अपना चेहरा उनके बूब्स के पास ले गया और अपने गालो और
जीभ से उनके बूब्स को सहलाने लगा। मैने अपने हाथ से उनके बूब को पकड़ लिया और
छूने लगा ऐसा करते ही मेरी मामी पागल सी हो गयी उन्होने मेरा लंड और कस कर
पकड़ लिया और सहलाने लगी फिर मैने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अनपे छोटु को
निकाल के उनके हाथ में दे दिया। मेरी मामी बहुत अच्छी तरह से मेरे छोटु को
सहला रही थी तभी मैने उन्हे पलंग पर बैठा दिया और उनके सामने जाकर खड़ा हो
गया। वो समझ गयी कि मैं चाहता था कि वो मेरे लंड को चूसे उन्होने मेरे लंड को
कस कर पकड़ा और चूमने लगी।

मैने उन्हे अपने लंड को मुंह में लेने को कहा उन्होने मेरे छोटु के सामने
वाले हिस्से को जिसे हम सुपाड़ा कहते हैं उसे मुंह में ले लिया मुझे काफ़ी मज़ा
आ रहा था मैं और मज़ा लेना चाहता था मैने अपनी मामी के सिर को पकड़ा और अपना
लंड को और अन्दर घुसाता चला गया देखते ही देखते मेरा पूरा का पूरा लंड उनके
मुंह के अन्दर था मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था मुझे लगा कि मेरा लस कहीं उनके मुंह
में ही न गिर जाये इसलिये मैने अपने छोटु को निकाल लिया। उसके बाद पता नहीं
मामी को क्या हुआ मामी ने फिर से मेरा लंड चूसना शुरु कर दिया मेरा लंड
फ़ुलसाइज़ का हो गया था फिर मैं पूरा नंगा हो गया मामी की नाइटी भी पूरी उतार
दी उनको नंगा देखकर मेरा लौड़ा पूरा सनसना उठा अब मेरे लौड़े को कुछ चाहिये था
तो वो थी मामी की चूत मैं ने मामी को बिस्तर में लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़
गया और अपने लंड से उनकी चूत को सहलाने लगा फ़िर थोड़ी देर बाद जैसे ही अपना
लंड उनकी चूत में डाला तो मेरी मामी के मुंह से आवाज़ निकली "आऊउछह्हह" ऐसा
लगा जैसे मामा ने उन्हे कभी चोदा ही नहीं। मैं ने कन्डोम भी नहीं लगाया था
मैं ने अपनी मामी को कस के पकड़ लिया और अपना लंड और अन्दर घुसाता चला गया
मेरी मामी दर्द से सिमट सी गयी थी। थोड़ी देर बाद उन्हे भी मज़ा आने लगा मैने
जब चोदते हुए अपनी मामी के चेहरे की तरफ़ देखा तो वह आंखें बंद कर के मुस्करा
रही थी उन्हे काफ़ी आनंद आ रहा था। फिर मैने अपनी मामी को घोड़ी बनने को कहा वो
दोनो घुटनो और हाथो के बल अपनी गांड मेरी तरफ़ करके लेट गयी।

मैने अपने हाथो से उनकी गांड को पकड़ कर पहला दिया मुझे उनकी गांड का छेद नजर
आ रहा था। मेरा लौड़ा उसमे घुसने को बिल्कुल तैयार था मैने अपना लौड़ा जैसे
उनकी गांड में टिकाया तो मेरी मामी ने माना कर दिया कहने लगी कि गांड में
घुसाने में बहुत दर्द करता है। लेकिन लौड़ा है कि मानता नहीं मैं ज़िद करने लगा
तो मामी मान गयी और कहा कि धीरे धीरे घुसाना मैं अपना लौड़ा ले कर तैयार हो
गया और घुसाने लगा मैं जानता था कि मामी को दर्द हो रहा है लेकिन मुझे मज़ा आ
रहा था उनकी गांड का छेद बहुत छोटा और टाइत था बहुत मुश्किल से अन्दर घुस रहा
था मैने भी पूरा ज़ोर लगा दिया। धीरे धीरे जगह बनती गयी और छेद फैलने लगा मेरा
लंड और अन्दर घुसता चला गया। मैं अपने लंड को अन्दर बाहर करता गया मामी की
चिकनी चिकनी गांड में मेरा लंड मज़े कर रहा था फिर मैने अपना लंड उनकी गांड से
निकाल लिया और मामी को लिटा दिया और उनके पेट पर बैठ गया और अपने लंड को दोनो
बूब्स के बीच सहलाने लगा मैने अपनी मामी से कहा कि क्या चिकनी चूची है तो
मामी शरमाने लगी। मैने अपनी मामी से कहा कि मेरे लंड को चूसो न तो मामी ने
मेरे लंड को पकड़ा और अपने गालों से सहलाने लगी और मुझसे पूछा कि कैसा लग रहा
है मैने कहा पहले चूसो तो। तब मामी मेरे लंड को अपनी जीभ से चूसने लगी और
दातों से काटने लगी मैं तो मज़े में पागल हो रहा था मुझसे सहा नहीं गया और
मैने उनके मुंह में ही गिरा दिया मामी मेरे लस को चाटने लगी। मेरी मामी ने
कहा कि ये तूने क्या किया मैं समझ गया कि मामी अभी और चुदवाना चाहती है। मैने
कहा कि घबराओ नहीं अभी मैं तुम्हे और चोदुंगा। लेकिन मेरा लंड मुरझा गया था।

मैं अपनी मामी के बूब्स को पकड़ के चूसने लगा और अपनी मामी की चूत को अपनी
उंगलियों से सहलाने लगा मामी में अभी भी बहुत जोश बाकी था। उन्होने भी मेरे
लंड को सहलाना शुरु कर दिया। धीरे धीरे मेरा लंड फिर से तनने लगा था जैसे ही
मेरा लंड थोड़ा कड़ा हुआ मेरी मामी ने उसे अपने मुंह में ले लिया और कस कस के
चूसने लगी वो मुझसे किसी भी हाल में और चुदवाना चाहती थी मेरे लंड को बार बार
अपने मुंह में घुसाती और निकालती। वो मेरे लंड को इतनी जोर से चूस रही थी कि
उनके चूसने की आवाज़ आने लगी मेरा लंड भी अब तैयार हो गया था मैं भी उनके
चेहरे को हाथ में लेके अपने लंड को अन्दर ठेलने लगी, क्या मज़ा आ रहा था। मामी
ने कहा कि मुझे और चोदो न तभी मैने अपनी मामी को लिटा दिया और उनकी जांघ को
चाटने लगा चाटते चाटते मैं उनकी कमर तक पहुंचा तो देखा कि मेरी मामी मज़े में
तिलमिला उठी तभी मैने उनकी 1 टांग को अपने कंधे पर रख लिया और अपने लंड को
उनकी चूत में टिका दिया और अन्दर घुसा दिया और फ़िर इतनी रफ़्तार से चोदा उनको
मामी बोल रही थी थोड़ा धीरे धीरे करो मामी की चूत गीली हो गयी थी चोदने में और
मज़ा आ रहा था मेरा लंड चूत में आसानी से फ़िसल रहा था मैं ने मामी की चूत ढीली
कर दी थी मुझे डर था कि मामा को पता न चल जाये क्योंकि मामी की चूत बहुत टाइट
थी।

और मैं ने चोद चोद कर उसे ढीली कर दी थी फिर मैं ने मामी को कहा कि चलो कोई
और स्टेप करते है मामी ने मुझे पलंग में लेटने को कहा और मेरे ऊपर चढ़ गयी वो
अपने बूब्स के निप्पल को मेरे होंठों के पास लाने लगी मैं उनके निप्पल काटने
लगा फ़िर वो मेरे लंड को पकड़ के मेरे लंड से अपने चूत को सहलाने लगी फ़िर धीरे
धीरे अन्दर घुसाने लगी मामी मेरे लंड के ऊपर बैठ गयी और हिलने लगी, मुझे बहुत
मज़ा आ रहा था जब वो मेरे ऊपर बैठ कर हिल रही थी तब उनके बड़े बड़े बूब्स हिल
रहे थे वो नाज़ारा मैं कभी नहीं भूल सकता मामी के गोरे गोरे दूध और गुलाबी
गुलाबी निप्पल मामी अपने हाथ से अपने बूब्स को सहला रही थी और अपने निप्पल को
दबा रही थी मैने फ़िर मामी की गांड को कस कर पकड़ा और निकोटने लगा फ़िर मैं ने
मामी को नीचे लिटा दिया और मेंढक की तरह चढ़ गया फ़िर मैं मामी को ज़ोर ज़ोर से
चोदने लगा मामी अपने दोनो हाथो से मेरी गांड को पकड़ने और मारने लगी मैने
चोदना और तेज़ कर दिया मामी की चूत से पानी छूट गया और मैं ने भी अपना लस
अन्दर ही गिरा दिया मामी ने कहा कि मुझे ऐसा कभी किसी ने नहीं चोदा है मैं
एकदम ही लस्त पड़ गया था कुछ करने की हालत में ही नहीं था। घड़ी की तरफ़ देखा तो
4 बज रहा था। ये चुदाई मैं ने पूरे 6 दिन की.

मैडम को खुश किया

यह जून के शुरू की बात है। तब मेरी परीक्षाएँ ख़त्म हो चुकी थी। मेरी इंग्लिश की मैडम बहुत सेक्सी हैं। उनका नाम शगुफ्ता है। वे अट्ठाईस वर्ष की हैं। उनका कद सवा पाँच फ़ीट, कसा शरीर है, उनकी चूचियाँ बहुत बढ़िया हैं। और वो कपड़े भी ऐसे पहनती कि उसके जिस्म का कुछ हिस्सा नज़र आता। क्लास में आती उसके चुचूक खड़े होते थे। कसी कमीज़ पहनती और ब्रा भी कसी, तो चुचूक खड़े होने की वजह अपने निशान उस पर बना लेते। फिर पढ़ाई तो भाड़ ही में जानी थी। मैं रोज़ ख्यालों में उसके साथ प्यार करता।
खैर मैं इंग्लिश पेपर लेकर उसके घर पेपर पर विचार-विमर्श करने गया। कितनी खूबसूरत लग रही थी शलवार-कमीज़ में। उसकी कमीज़ थोड़ी छोटी थी। उनके घर में इतना शोर नहीं था। लगता था जैसे कोई भी न हो। उनके पति आर्मी में हैं, वो शायद कहीं गए हुए हों।
उन्होंने मुझ से कहा- मैं किताब लाती हूँ फिर देखते हैं कि तुम्हारा पेपर कैसा हुआ।
उन्होंने मुझे अपने कमरे से आवाज़ दी और कहा- यहाँ आ जाओ।
मैं चला गया।

किताब ऊपर वाली शेल्फ़ पर पड़ी थी कमरे में। उफ़ क्या सीन था- मैडम किताब को लेने के लिए ऊपर होतीं और उनकी शर्ट भी ऊँची हो जाती, उनकी कमर नज़र आती। मेरा तो उसी वक़्त खड़ा हो गया। मैं उनके पास गया और मैंने मजाक करते हुए कहा- मैडम, मैं आप को उठाता हूँ, आप किताब उतार लें।
और जो उत्तर मुझे मिला उसकी मुझे बिल्कुल भी आशा नहीं थी।
उन्होंने कहा- हाँ ! ठीक है ! मुझे तुम ऊपर उठाओ।
मैंने जल्दी में जवाब दिया- जी मैडम !
उन्होंने कहा- ठीक है आज मैं तुम्हारा जोर देखूं !
मैं तो चाहता ही यह था। मैं मान गया।
मैडम काफ़ी भारी थी मगर मैंने उन्हें उठा ही लिया। उनकी गांड मेरी पेट से लग रही थी, वो अभी किताब को ऊपर ढूंढ रही थी कि मुझसे पूछने लगी कि थके तो नहीं ?
मैंने कहा- नहीं !
मैंने उसे थोड़ा सा नीचे किया और उसकी गांड अब मेरे खड़े हुए लंड के साथ लगने लगी। उसने कुछ भी नहीं कहा। इससे लग रहा था कि मेरी बरसों की खवाहिश पूरी होने जा रही है।
मैंने पूछा- मैडम, किताब मिली या नहीं?
उसने कहा- सबर करो !
मैंने आहिस्ता-आहिस्ता अपना हाथ उनकी कमीज़ के नीचे ले जाना शुरू किया। उनको लगा कि मैं थक गया हूँ और वो फिसल रही हैं।
खैर मैडम को लगने लगा कि मेरा लंड तो बस मेरी चड्डी फाड़ने लगा था।
उन्होंने फ़ौरन मुझे कहा- तुम मुझे उतार दो !
मैंने उन्हें जल्दी उसे उतार दिया। उफ्फ्फ ! उनके खड़े चुचूक देखकर मेरे अन्दर करंट आ रहा था।
उन्होंने कहा- किताब नहीं मिल रही ! मैं तुम्हारे लिए कुछ पीने को लाती हूँ ! फिर ऐसे ही पेपर देख लेंगे।
मैं कहा- ओ के !
वो किचन में चली गई। मैं अब कमरे में अकेला था। मैंने अपने लंड को जल्दी हाथ लगाया और दबाया ताकि जल्दी ही मुठ निकले और मुझसे मैडम के साथ कोई ग़लती न हो जाये।
मैं अभी अपना लण्ड दबा ही रहा था कि मैडम शरबत लेकर आई। वो कब रसोई से निकली, कुछ पता नहीं चला।
उन्होंने मुझे लंड दबाते देख लिया, मैंने जल्दी अपने लंड पर से हाथ उठा लिया। किसी हद तक मैं भी चाहता था कि मैडम मुझे देखे।
वो एकदम से डर गई। मैडम ने मुस्कुराते हुए पूछा- यह क्या कर रहे थे?
मैंने कहा- कुछ नहीं !
वैसे मैं भी कुछ खिसिया गया था। मैंने शरबत लिया और वो दरवाज़े की तरफ बढ़ी और दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने हैरान होकर उन्हें देखा, उन्होंने कुछ नहीं कहा और मेरे पास आ कर बैठ गई। वो इतना पास बैठी कि मैं दूर नहीं हो सकता था। मैंने उनकी आँखों में देखा तो ऐसे लग रहा था कि अब वो सेक्स की तलाश में हैं। मैंने उनको छूना चाहा लेकिन डर रहा था। उसके बाद उन्होंने मुझसे पेपर लिया और फेंक दिया और पूछा- तुमने पहले कभी किया है?
मैंने पूछा- क्या?
उन्होंने कहा- अंजान मत बनो !
मैं दिल ही दिल में खुश हुआ और उन्हें जवाब दिया- जी हाँ ! एक बार !
उन्होंने पूछा- x, xx या xxx।
मैंने जानबूझ कर उनसे पूछा- इनका मतलब क्या है?
उन्होंने कहा- सिर्फ चूमा-चाटी, मसलना-रगड़ना या सब-कुछ?
मैंने फ़ौरन जवाब दिया- जी मैडम !
मुझसे बिल्कुल भी कण्ट्रोल न हुआ और मैंने उन्हें जल्दी से दोनों हाथों से पकड़ा और सोफे पर लिटा दिया और अधीर हो कर होंठों को चूमने लगा। उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और मैं गर्म हो गया। फ़िर फ्रेंच किस भी की। मेरा लण्ड तो पूरा सख्त हो गया।
उन्होंने मेरे मुँह पर बहुत चुम्बन लिए। उनके मम्मे तो शर्ट में भी थोड़े थोड़े नज़र आ रहे थे। वो भी गरम हो गए और मेरी चूमा-चाटी उन्हें और गरम करती गई। उन्होंने सोफा सख्ती से पकड़ लिया और मुझे करने दिया जो मैं करना चाहता था। मैंने उनकी शर्ट उतारी और अपनी भी। वो इतनी गरम हो चुकी थी कि लाल हो रही थी। मैंने उनकी सलवार उतारी और उनके बड़े बड़े चूतड़ों को दबाने लगा।
मेरा लंड भी गरम था और उसकी चूत भी गरम थी। बस मैंने उसकी ब्रा पीछे से खोली और उतार कर फेंक दी, मैडम के चुचे जैसे आजाद हो गए हों और ज्यादा खड़े हो गए। मैंने उनके चूचों को बहुत ज्यादा दबाया और चूसा। उफ्फ्फ ! वे इतने स्वादिष्ट थे।
मैंने शर्ट-पैंट पहनी हुई थी। मैंने अपनी पैंट उतारी और अंडरवियर भी ! और कहा- मैडम ! प्लीज़ उल्टी हो जाएँ।
उन्होंने मुझसे कहा- चोदोगे मुझे?
मैंने कहा- अब कण्ट्रोल नहीं होता।
उनके मम्मे सोफे पर दब गए और मैं और अपना धैर्य खोते हुए मैडम की कमर पर चूमने लगा, उनकी कमर पर हाथ फेरा, उन्हें मज़ा आया। मैं उनकी कमर पर लेट गया और मेरा लंड उनकी योनि से छू गया। फ़िर सीधा करके उनके चुचूकों को चूसना शुरू किया और पैरों को ऊपर की ओर कर दिया और अपना लंड उनकी चूत में डाला।
क्या तंग योनि था। फिर भी मैंने आसानी से अंदर किया, थोड़ा गया और उन्हें मज़ा आया। वो आह ऽऽ.. ओह ऽऽ.. औरऽऽ और ऽऽ जैसी आवाजें निकाल रही थी। मैंने और जोर लगाया और पूरा लंड अन्दर डाल दिया, वो चीखी लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका। मैंने अब अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करना शुरू किया।
मैंने उन्हें 20-25 मिनट चोदा, मेरा वीर्य निकल आया और मैडम का भी .. उफ्फ्फ्फ़ क्या दिन था । मैंने सोचा भी न था।
मैडम ने मुझे कहा- अब तुम चूचों के बीच में डालो !
अपना लंड मैंने चूचों के बीच में रख कर आगे-पीछे किया। मुझे बहुत मज़ा आया। मैंने उनके पूरे जिस्म पर चूमा-चाटी की और फिर कपड़े पहने।
फ़िर एक जोरदार चुम्मा लेकर पूछा- मैडम आप चाहती हैं कि मैं फिर आऊँ?
मैडम ने कहा- हाँ ! मुझे अपना फोन नंबर दो ! जब घर पे कोई नहीं होगा तो तुम्हें बुलाऊँगी।
मैंने कहा- ठीक है ।
मगर उन्होंने यह भी कहा- तुम मुझे फोन नहीं करोगे !
मैंने कहा- ठीक है !
मैंने अपना मोबाइल नंबर दिया।
अब तक मैं उनके साथ तीन दफा कर चुका हूँ।

दोस्त की बीवी की चुदास

हैलो साथियो.. मेरा नाम सनी है.. मैं इंदौर में रहता हूँ। मेरी उम्र 26 साल है और कद 5 फुट 7 इंच है.. मेरा लिंग 7 इन्च लम्बा है।

मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ.. सबसे पहले मैं आपको बता दूँ कि मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ.. और अन्य लोगों की तरह मुझे भी मेरी कहानी बताने का मन हुआ।

अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ.. मैं और मेरे एक दोस्त की बीवी राधिका (बदला हुआ नाम.. जिसे मैं भाभी बोलता था) हम दोनों के बीच शारीरिक सम्बन्ध बन गए थे।

हुआ यूँ कि मेरा मेरे दोस्त के घर रोज आना-जाना था.. हम दोनों पारिवारिक मित्र थे और मेरा उनके घर बहुत पहले से ही आना-जाना था। उस समय मैं कुंवारा था और दिखने में हष्ट-पुष्ट हूँ।

मेरे दोस्त की शादी हुए दो साल ही हुए थे। मैं मजाकिया व्यक्ति होने की वजह से भाभी से बहुत मजाक-मस्ती किया करता था और जब कभी भैया घर पर नहीं होते थे.. तब भी मैं उनके घर चला जाया करता था.. पर मेरे दिल में भाभी को लेकर कभी कोई गलत विचार नहीं आए।
मगर पता नहीं भाभी मुझसे कब से अपने आपको चुदवाने की तैयारी कर रही थीं.. मुझे मालूम ही न चला।

मेरे मोबाइल में हमेशा गंदे मैसेज.. गन्दी फ़ोटो और ब्लू फ़िल्म रहते थे..

एक बार मेरे दोस्त के पापा की बहुत ज्यादा तबियत खराब होने की वजह से उन्हें इंदौर से बाहर मुम्बई ले जाना पड़ा। मेरा दोस्त उसकी माँ और पापा को अपने दूसरे मित्र के साथ इलाज करवाने मुम्बई ले गया और उन्हें कुछ दिन वहाँ पर रुकना पड़ा। इस बीच वह मुझे उसके घर पर अपनी अकेली पत्नी के पास रात रुकने का बोल कर छोड़ कर चला गया।

मैं रात को उनके घर रुकने के लिए चला गया और मैंने भाभी से मेरा बिस्तर हाल में लगाने का कहा।
भाभी ने कहा- भैया मैं आपके लिए ही बैठी थी.. मैंने अभी तक खाना नहीं खाया है.. प्लीज आप मेरे साथ खाना खा लो.. फिर मैं बिस्तर लगा देती हूँ।

फिर हम दोनों ने खाना खाया और मैं अपने बिस्तर पर हाल में सोने चला गया और भाभी अपने कमरे में..

करीब आधे घंटे बाद अचानक से बिजली चली गई और बहुत जोरों कि बारिश होने लगी.. भाभी को बहुत डर लगने लगा और वो मुझे उठाने हाल में आईं.. तो देखा कि मैं अपने मोबाइल में ब्लू-फ़िल्म देख रहा हूँ.. तो बिना कुछ बोले मेरे पीछे खड़ी होकर मेरे मोबाइल की ब्लू-फ़िल्म देखती रहीं और अपने ब्लाउज में हाथ डालकर अपने स्तनों को जोर-जोर से दबाने लगीं।

मैं हाल में बिना किसी चिंता के केवल अंडरवियर और बनियान में लेटा हुआ था और मेरा भी 7 इंच का लिंग फनफनाता हुआ खड़ा था.. मगर मुझे नहीं पता था कि भाभी पीछे से ब्लू-फ़िल्म देख कर मस्त हो रही हैं।

इतने मैं अचानक लाइट आ गई और मैंने पलट कर देखा भाभी आँखें बंद कर अपने स्तन जोर-जोर से दबा रही थीं। रोशनी के आने से अचानक उनकी आँख खुली तो वह अपने कपड़े सीधे करने लगीं और घबरा गईं।

मुझसे मेरे तने हुए लिंग को देख कर बोलीं- यह क्या कर रहे हो?

मैं भी घबरा गया और अपने लिंग को दबा कर बिठाने लगा.. तो वो मुझसे बोलीं- क्यों डर लग रहा है क्या?
मैं बोला- भाभी प्लीज किसी को मत बताना.. वरना मैं मर जाऊँगा।
तो वो मुझसे बोलीं- मरें तेरे दुश्मन.. मैं तो तेरे इस डंडे का मजा लूटूँगी..

वो मुझे हाथ पकड़ कर जबरन उठाते हुए अपने कमरे में ले गईं और मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर मेरा लिंग पकड़ कर बोलीं- मेरे राजा प्लीज़.. आज मौका अच्छा है और घर पर भी कोई नहीं है.. मैं तो कब से तेरे 7 इंच लम्बे लौड़े से चुदना चाहती थी.. मगर क्या करूँ.. बोल नहीं पा रही थी। तुम्हारे दोस्त का तो लिंग खड़ा ही नहीं होता है और होता भी है.. तो केवल 2 मिनट के लिए होता है.. जिससे मुझे मजा नहीं आता है। आज मैं तुमसे चुदवा कर अपनी इच्छा पूरी करूँगी..

भाभी ने मेरे लौड़े को बाहर निकाल कर चूसना शुरू किया और पूरा लण्ड मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगीं। मैंने भी उनके ब्लाउज को खोलकर अलग किया और उनके 36 इंच के मम्मों को ब्रा से मुक्त करके चूसना चालू कर दिया।

फिर मैंने उन्हें ब्लू-फ़िल्म दिखाते हुए.. उनकी साड़ी और पेटीकोट अलग किया और उनको पैंटी में करके उनकी पैंटी में हाथ डालकर उनकी चूत को सहलाया। उनकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे.. मैंने अपनी उंगली अन्दर-बाहर की.. तो वो सिसियाने लगीं- आह.. आअह.. आह आह.. आह.. प्लीज.. मेरी चूत चूसो..

मैंने पैंटी उतार कर अलग फ़ेंक दी और उन हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। बहुत देर तक एक-दूसरे के लिंग और योनि को चूसते रहे। हम दोनों के मुँह से “आह.. आह.. ऊह.. ऊह्ह..” की आवाज आने लगी। फिर मैंने भाभी को सीधा बिस्तर पर लेटाया और उनकी टाँगें चौड़ी करके अपना सुपारा उनकी चूत के छेद पर लगा कर एक जोर का धक्का दिया.. और भाभी की चूत में पूरा लिंग अन्दर पेल दिया।

लौड़े के घुसते ही भाभी की चीख निकल गई- ऊई माँ.. मरर.. गई.. आह.. आह आह.. धीरे करते न.. आह्ह.. और अन्दर तक डालो.. आह.. ऊह्ह.. ऊह्ह.. और जोर से.. और जोर से.. ऊह.. ऊह.. मजा आ गया.. आह्ह..

काफ़ी देर तक धकापेल चुदाई के बाद हम दोनों का माल निकल गया। भाभी मुस्कुरा कर मुझसे लिपट कर मेरी बाँहों में सिमट गईं और बोलीं- आज मुझे असली मर्द का मजा मिला है..
उसके बाद हम दोनों जब-जब मौका मिलता.. ब्लू-फ़िल्म देख कर उसी की स्टाइल में चुदाई करते थे।

आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी.. मुझे ईमेल करें!
snnys85@rediffmail.com

मौसी की चूत की आग

हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब..!

मैं देशी43 का बहुत पुराना पाठक हूँ। मेरी कहानी शुरू होने से पहले मैं सभी लंडधारियों को प्रणाम करता हूँ और चूत की मालकिनों को नमस्कार करता हूँ।
मेरी हाइट 5 फुट 10 इंच है और दोस्तों के साथ घूमना मस्ती करना.. पढ़ाई करना.. इन सब में ज़िंदगी बीत जाती है।
मेरी उम्र 22 साल है और मैं पढ़ाई करता हूँ.. हम लोग मुंबई में रहते हैं, मेरे घर में मम्मी डैडी के साथ मैं और मेरी बहन रहती है।

अब मैं सीधे कहानी पर आता हूँ।
यह कहानी मेरी ज़िंदगी की पहली और सच कहानी है.. मैंने अब तक की ज़िंदगी में कभी किसी लड़की को छुआ भी नहीं था लेकिन जब यह घटना हुई.. उस टाइम मेरी उम्र 20 साल थी।
मतलब आज से 2 साल पहले की ये घटना है। मैं कॉलेज गया हुआ था.. मैं कॉलेज से यही कोई 3-4 बजे घर आता हूँ।

घर आया तो मेरी अन्नू मौसी घर आई हुई थीं.. उनकी शादी को 4 साल हो गए थे। वो यहीं मुंबई के पास में ही नासिक में रहती हैं। मैंने मौसी को देखा तो बहुत खुश हुआ.. क्योंकि उनसे मैं उनकी शादी में ही मिला था.. उसके बाद कभी आना-जाना नहीं हुआ।
एक बात यह कि वे मेरी मम्मी की सबसे छोटी बहन थीं.. मतलब आज उनकी उम्र 28 साल है। शादी के वक़्त उनकी उम्र सिर्फ़ 24 साल थी।

चलो अच्छा है। मुझे भी कोई साथ टाइम साथ बिताने के लिए मिल गया था।

मम्मी ने बाद में मुझे कहा- अभी एक महीना तेरी मौसी यहीं घर पर ही रहने वाली हैं.. तेरे मौसा जी एक महीने के लिए विज़िट पर गए हैं, उनके लिए गेस्ट-रूम तैयार कर दे।

मैं भी बहुत खुश था.. क्योंकि मुझे भी मेरी बहन और मौसी के साथ टाइम बिताने के लिए वक्त मिल गया था। मैंने मौसी के लिए गेस्ट-रूम खाली कर दिया और अपनी बहन के साथ मिल कर वहाँ साफ-सफाई कर दी।

ऐसे ही हँसी-मज़ाक में कब मौसी को आए 15 दिन हो गए.. मालूम ही नहीं पड़ा.. फिर मेरी बहन भी अपने हॉस्टल वापस चली गई। अब मैं और मेरी मौसी दोनों ही साथ में हँसी-मज़ाक करते हुए रहने लगे।

एक दिन मैंने बात-बात में मौसी से पूछा- आपकी शादी को 4 साल हो गए.. आपने बच्चे के बारे में क्यों नहीं सोचा?
उन्होंने उस बात को टाल दिया.. फिर कभी मैंने भी दुबारा नहीं पूछा।

दूसरे दिन अचानक मम्मी ने कहा- तू अपनी मौसी को बाइक पर ले जाकर कुछ शॉपिंग करवा ला।
मैंने बोला- ठीक है.. कब जाना है?
तो मौसी बोलीं- आज शाम को चलूँगी।
मैं बोला- ठीक है.. शाम को 6 बजे चलते हैं।
मम्मी की आवाज़ आई- इतनी देर से क्यों.. शाम को 5 बजे चला जा ना..
फिर मौसी भी बोलीं- हाँ 5 बजे ठीक रहेगा।

मैं उस दिन दोस्तो के साथ घूम कर 4 बजे घर आया।
उसके थोड़ी देर आराम करने के बाद मौसी बोलीं- चल मार्केट चलते हैं।
मैं बोला- चलो..

फिर हम दोनों बाइक पर चले गए।
शादी के आज 4 साल बाद भी मौसी की फिटनेस किसी रूप की सुन्दरी से कम नहीं थी। जो भी हमें देखता.. यही सोचता की मियां-बीवी जा रहे हैं।

क्या मालूम उस दिन मौसी को ले कर मेरे दिमाग में अलग-अलग तरह फीलिंग्स आ रही थीं।
जब भी मैं बाइक स्लो करता तो मौसी का स्पर्श पाते ही.. दिल और दिमाग में घंटी सी बजती। जैसे तैसे हम लोग दुकान पर पहुँचे।
वहाँ पर मौसी जी ने मौसा जी के लिए गरम कपड़े लिए, मैं समझ गया कि मौसा जी आने वाले हैं।

वहीं पर मौसी जी कपड़े मुझे पहना कर देख रही थीं.. कसम से वहीं मन कर रहा था.. कि मौसी जी को घर ले जाकर चोद दूँ और कसम से दिमाग में ये बात जैसे ही आई.. मैं मौसी जी को घूरे जा रहा था।
बाद में मौसी जी बोलीं- जनाब कहाँ खो गए।

मुझे भी लगा कि मैं पता नहीं किधर खो गया हूँ, मैं बोला- कहीं नहीं चला गया हूँ.. आपकी हो गई शॉपिंग?
मौसी बोलीं- हाँ चलो मुझे अभी और भी शॉपिंग करनी है।

मुझे मौसी के साथ घूमने में बहुत ही मज़ा आ रहा था।
उसके बाद मौसी एक लेडीज दुकान पर गईं और मुझे बाहर ही रुकने के लिए बोलीं।

काफ़ी देर इन्तजार करने के बाद जब मौसी नहीं आईं.. तो मैं दुकान के अन्दर गया, वो दुकान पर लेडीज चड्डी और ब्रा खरीद रही थीं, मुझे वहाँ देख कर बोलीं- तू इधर कैसे?
मैंने कहा- मेरा बाहर मन नहीं लग रहा था तो आ गया।
मौसी मुस्कुरा दीं।

मौसी जी ने दुकान वाले को ब्रा दिखाने के लिए कहा.. उसने बोला- बहन जी क्या साइज़ दूँ?
मौसी बोलीं- 36 की दिखाओ।

कसम से मौसी का फिगर तो दीपिका को भी फेल कर दे।
उसके बाद हम लोग घर आ गए।

मैंने मौसी को बोला- जो लिया है मौसी.. वो पहन कर तो दिखाओ।
मौसी बोलीं- जो तेरे साथ शादी करके आएगी.. वही दिखाएगी।
मैं बोला- अभी तो आप ही दिखा दो न.. आप भी तो अपनी हो।
मौसी बोलीं- तेरी मम्मी को पता चल गया ना.. तो हम दोनों को दिखा देगी।

मुझे विश्वास नहीं हुआ.. मौसी की यह बात सुन कर मैंने देखा कि लोहा दोनों तरफ से गरम है.. हाथ सेक ही लेता हूँ।

मैं बोला- आप और मैं ही तो हैं.. बस तीसरा कौन है.. बताने वाला।
मौसी बोलीं- क्या बात है मेरा कबीर बड़ा हो गया है।
मैं बोला- कबीर ‘का’ भी बड़ा हो गया है।
मौसी ने मुस्कुरा कर कहा- चल आ जा रात को मेरे कमरे में.. देखती हूँ कितना बड़ा हो गया कबीर का..

रात को खाना खाने के लिए बैठे तो मौसी मेरे सामने वाली सीट पर बैठी थीं। मैं मौसी की पैर से पैर मिला रहा था।
मौसी हल्के से बोलीं- थोड़ा सब्र कर.. मेरे राजा.. रात अपनी ही है..

रात को सबके सोने के बाद मैं बारह बजे मौसी के कमरे में गया, वहाँ मौसी मेरा ही इन्तजार कर रही थीं..
अन्दर जाते ही मैं मौसी के दूध मसलने लगा।

मौसी बोलीं- पहले बता तो.. कौन सी ब्रा पहनूं।
मैं बोला- अब तो सब उतरने वाली हैं..
मौसी हँसने लगीं- अच्छा मेरे राजा आ जा.. अपनी मौसी के पास आ जा.. और ताजा दूध पी ले..

मैं मौसी के चूचों में इतना घुस गया कि वहाँ एक ज़ोर का कट्टू कर लिया।
मौसी सिसिया बोलीं- आह्ह.. आराम से.. पूरी रात अपनी ही है..

उसके बाद मैंने मौसी के एक-एक करके सब कपड़े निकाल दिए और मौसी ने मेरे कपड़े निकाल दिए।

उसके बाद मैं मौसी की चूत को चाटने लगा.. और मैंने उनकी चूत को चाट-चाट कर लाल कर दी। मौसी की चूत ने भी पानी निकाल दिया।
।उसके बाद मौसी ने मेरे खड़े लंड को चूस-चूस कर लोहा कर दिया।

उसके बाद मैंने लंड मौसी की चूत पर लगाया.. तो मौसी बोलीं- आराम से मेरे राजा.. इस कुंए को इतने बड़े पाइप की आदत नहीं है.. घर का पाइप छोटा सा है.. मैं तो उसी में पानी भर लेती हूँ।
मैंने कहा- ठीक है आ जा मेरी जान.. इतना पानी भरूंगा कि कभी पानी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा.. मौसी की चिल्लाने की आवाज़ आने लगी- आराम से.. मेरी चूत फाड़ेगा क्या.. आराम से चोद न..c
लेकिन बिना सुने मैं ‘गपागप गपागप..’ लौड़ा डालता रहा और मौसी चिल्लाती रहीं- आई.. उई.. उहह.. आहह.. मार दिया रंडवे.. छोड़ दे.. आई उहउई.. आई आई मर गई रे.. तेरी माँ को चोद.. जा कर.. साले..

मौसी को चोदते हुए ये गालियां और गाली के साथ मौसी को चोदने में बहुत मज़ा आ रहा था।
उस दिन मैंने और मौसी ने 3 बार चुदाई की।

फिर एक दिन मौसा का फोन आ गया और मैं उनको छोड़ने चला गया।
मौसी को छोड़ने गया तो मौसी ने मम्मी को फोन करके मुझे वहाँ 5 दिन के रोक लिया।
उसके बाद मुझे मौसी ने कितनी और चूतें दिलाईं.. ये अगली कहानी में लिखूँगा।

आप सबको मेरी कहानी कैसी लगी.. मुझे ईमेल ज़रूर करना.. आपका अपना
राज कबीर.
786rajkabir@gmail.com

मामा की बेटी रेखा की चूत बनी भोसड़ा

मेरा नाम ललित अरोरा है, मैं तीन साल से देशी43 पर कहानियां पढ़ रहा हूँ.. सोचा इस बार अपनी कहानी लिख कर आप सभी से शेयर करता हूँ।

बात दो साल पहले की है.. उस वक्त मैं 12वीं में था। एक दिन मुझे किसी फैमिली प्रोग्राम में जाना था.. तो मैंने अपनी क्लास सुबह कर ली थी।

मैं जाने के लिए तैयार हो गया था। प्रोग्राम मेरे मामा के घर पर था.. दोपहर के वक्त मैं वहाँ पर पहुँच गया.. उधर मैं सबसे मिला और काफी देर के बाद मेरी मुलाकात मेरी मामा जी की लड़की से हुई.. जिसका नाम रेखा था।

हम दोनों दोस्त की तरह हैं और काफी टाइम बाद मिल रहे थे.. तो एक-दूसरे से हाथ मिलाया.. और बातें करने लगे।
रेखा बहुत सुंदर है और उसकी उम्र 20 साल है.. उसका बदन 36 -24 -34 का है और हर कोई कॉलेज में उसका दीवाना है।

उसके बाद रात में प्रोग्राम शुरू हो गया।

मैंने खाना खाया और रेखा के पास पहुँच गया और बातें करने लगे।
जगह कम होने की वजह से हम दोनों को एक ही बिस्तर पर सोना था। मैं यह बात जान कर काफी खुश था.. पर मुझे क्या पता था कि रेखा मुझसे भी ज्यादा खुश होगी।

हम सोने की तैयारी करने लगे।
एक ही बिस्तर पर सोते-सोते हम बातें करने लगे, मैंने उससे पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?
तो उसने धीरे से बोला- हाँ है।
ऐसे ही इधर-उधर की बात करते रहे।

फिर एकदम से रेखा ने मेरे कान में बोला- मैं तुम्हें किस कर सकती हूँ क्या?
मैंने कुछ नहीं बोला और उसने किस करना शुरू कर दिया।
मुझे काफी मजा आ रहा था.. मैंने भी उसे जोर-जोर से किस करना शुरू कर दिया।

हम दोनों एक-दूसरे को पागलों की तरह किस करने लगे और अचानक मेरा हाथ उसके चूचों पर चला गया। उसने कोई विरोध नहीं किया.. तो मैंने धीरे-धीरे उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया।
अब उसे भी मजा आने लगा था.. फिर हमने अपने कपड़े उतार दिए और 69 की पोजीशन में आ गए।

मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3. 5 इंच मोटा है.. जिसे देख कर रेखा एक बार तो डर सी गई थी.. पर उसे तो आज चुदना ही था.. तो उसने बिना किसी डर के मेरा लंड मुँह में ले लिया।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

हम दोनों 69 की पोजीशन में थे.. मैं उसकी रसीली चूत चाट रहा था.. जो काफी गीली हो गई थी।
उसकी चूत पर काफी बाल थे और एकदम गुलाबी चूत थी.. जिसे देख कर मजा आ गया था।
वो मेरा लंड चूसे जा रही थी और मैं उसकी चूत में उंगली कर-करके चाट रहा था।

लगभग 15 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा.. रेखा दो बार झड़ चुकी थी और मेरा भी बस निकलने वाला था, मैंने उससे कहा- जल्दी करो.. निकलने वाला है..
तो उसने जोर-जोर से मेरा लंड चूसना चालू कर दिया.. थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया।
मेरे माल की पिचकारी उसके मुँह में निकल गई और वो सारा का सारा पानी पी गई।

फिर थोड़ी देर हम ऐसे ही लेटे रहे। मैं उसके चूचों को मसल रहा था और वो मेरे लंड को हिला रही थी। थोड़ी देर में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मुस्करा कर एक बार फिर अपने मुँह में मेरा लंड डाल लिया।

थोड़ी देर लण्ड चुसाने के बाद मैंने उसको सीधा लिटा लिया और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया। मैंने ढेर सारा थूक अपने लंड पर और उसकी चूत पर लगाया..
उसने मुझसे बोला- धीरे डालना..
मैंने कहा- फ़िकर मत करो.. जरा सा भी दर्द नहीं होगा।

थोड़ी देर लंड उसकी चूत पर रगड़ने के बाद मैंने एक जोर का झटका मारा। वो चिल्लाने लगी- ऊई… ई… ई… माँ… आ… अह.. बाहर निकालो.. बहुत दर्द हो रहा है।
मैं थोड़ी देर यूँ ही रुक गया और उसे किस करने लगा.. उसके चूचे दबाने लगा थोड़ी देर बाद वो दर्द भूल गई और उसे मजा आने लगा।

फिर मैंने एक और झटका मारा.. इस बार मेरा आधे से जादा लंड उसकी चूत में घुस चुका था। इस बार उसे दर्द भी कम हो रहा था।
फिर मैंने धीरे-धीरे झटके मारने चालू कर दिए और पूरा लंड उसकी चूत में सैट कर दिया।

उसे काफी मजा आ रहा था.. उसके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारी निकल रही थी- आह आहा.. हहाहा..
उसकी आँखें बंद थीं.. मानो उसकी चूत को लौड़े की रगड़ाई का सुख मिल रहा हो।

फिर मैंने झटके तेज कर दिए.. उसकी सिसकारियाँ भी तेज होने लगीं और वो जोश में आकर बोलने लगी- आह्ह.. आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दो.. मुझे रंडी बना दो.. मेरी चूत फाड़ दो.. बहुत तड़पाती है साली.. आज मजा आया.. हाँ और जोर से.. अहह..
ये सब सुन कर मेरा भी जोश बढ़ रहा था।

मैंने कहा- ले साली.. मेरी रंडी.. तेरी चूत को भोसड़ा बना दूँगा.. पूरी रात चोदूँगा साली कुतिया.. ले..

हम दोनों को काफी मजा आ रहा था। फिर मैंने अपनी पोजीशन बदली.. मैं बिस्तर पर लेट गया और उसे अपने ऊपर ले लिया।

मेरा लंड सीधे उसकी चूत में घुस गया। और वो ऊपर से झटके मारने लगी। फिर मैंने नीचे से झटके लगाने शुरू कर दिए उसे बहुत मजा आ रहा था।
वो बोल रही थी- और जोर से चोदो.. आह्ह!
मेरी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी।

थोड़ी देर बाद मैं थक गया और वो ऊपर से ही झटके मारने लगी।
फिर मैंने उसे कुतिया बनने के लिए कहा.. वो हँसने लगी और बिस्तर पर मम्मे झुलाते हुए झुक गई।

फिर मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया.. उसके मुँह से सिसकारी निकल गई।
मैं उसे बड़े मजे से चोदे जा रहा था.. काफी मजा आ रहा था।
रेखा अब तक कई बार झड़ चुकी थी मेरा भी निकलने वाला था।

हमारी चुदाई आधा घंटा चली होगी।
मेरे झटके तेज हो गए मैंने उससे कहा- मेरा आने वाला है..
तो उसने कहा- अन्दर ही डाल दो।

मैंने और तेजी से चुदाई चालू कर दी और दस-पंद्रह झटकों के बाद मेरी पिचकारी उसकी चूत को भिगोने लगी और मैं उसी के ऊपर लेट गया।

थोड़ी देर में मेरा लन्ड बाहर निकल आया और उसकी चूत से मेरा और उसका पानी निकल रहा था।

उसके बाद हम दोनों ने आराम किया। थोड़ी देर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। इस बार तो मंत्र लौड़ा और भी ज्यादा टाइट हो गया था।

रेखा देख कर हँसने लगी.. उसने लौड़े को अपने मुँह में डाल लिया और बोलने लगी- आज रात तो मेरी चूत का भोसड़ा बन कर ही रहेगा।
मैंने उसके दूध दबा कर कहा- हाँ आज चूत का भोसड़ा बना कर ही रहूँगा।
रेखा ने कहा- इस बार मेरी चुदाई तेल लगा कर करो।

मैंने अपने लंड पर काफी तेल लगा लिया.. बहुत चिकना हो गया था।

रेखा मेरे लंड पर हल्के-हल्के हाथ फेर रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। फिर मैंने उसे लिटा लिया और उसकी चूत पर भी तेल लगाने लगा।

तेल उंगली पर लगा कर उसकी चूत में घुसा दी.. वो झटपटाने लगी।
मैंने फिर अपना लंड उसकी चूत पर रखा और जोर लगाया.. इस बार लंड आसानी से अन्दर चला गया।
फिर मैंने धीरे-धीरे झटके मारने शुरू कर दिए। इसी बीच रेखा बोल रही थी- आअह्ह्ह्ह.. डालो और जोर से आह आह्ह्ह्ह.. चोदो मुझे और जोर से..

अब कमरे में बस हमारी सांसें और चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं। कमरे में केवल एक ही आवाज ज्यादा सुनाई दे रही थी ‘फ़च्च फ़्च्च फ़्च्च.. आह आआह्ह.. इइह्ह्ह्ह्म्म्म..’

फ़िर 15 मिनट बाद जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ.. तो मैंने उसे उठा कर बिस्तर के नीचे बिठाया और खुद बिस्तर पर बैठ कर अपना लंड उसके मुँह पर रख दिया।
थोड़ी देर में मेरी सारी पिचकारी उसके मुँह में निकल गई और वो सारा पानी पी गई।

रात बहुत हो गई थी.. हमने अपने कपड़े पहने और एक-दूसरे से चिपक कर सो गए।
सुबह होते ही मैं वहाँ से अपने घर आ गया और रेखा को धन्यवाद किया। जब भी मैं इस पल को याद करता हूँ.. तो मेरा मन मुठ मारने का हो जाता है।

यह कहानी लिखते-लिखते भी मैंने दो बार मुठ्ठ मारी है।
आप सबका भी धन्यवाद.. अपने विचार जरूर भेजिएगा।

llarora7@gmail.com

अहसान के बोझ तले

मेरा नाम रूद्र प्रताप है मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ, पिताजी सरकारी बाबू हैं। अचानक ही उनका तबादला जबलपुर हो गया तो बड़े शहर में खर्च को लेकर चिन्ता होने लगी, मकान भी नहीं मिल रहा था। तभी पापा के मित्र वर्मा अंकल जो कि वकील थे, उन्होंने हमारी मदद की।

वर्मा जी शहर के जाने माने वकील थे, उनका आलीशान तीन मंजिला बंगला शहर की पॉश कालोनी में था, हमें ऊपर वाली खाली पड़ी मन्जिल मिल गई सस्ते किराए में।

कहानी शुरू होती है ऐसे कि हमारे परिवार में तीन लोग ही थे, दीदी ससुराल जा चुकी हैं। वर्मा जी के परिवार में सात लोग उनके माता-पिता और बच्चे राम, शीतल व कुशल !

राम इसी साल रूस जाने वाला था मेडिकल की पढ़ाई करने, जुलाई में चला भी गया। शीतल बारहवीं में, कुशल आठवीं में और शीतल से दो साल सीनियर हूँ।

मैं पढ़ाई में ठीक हूँ इस कारण से मेरी एक खास छवि बन गई थी। हम तीनों साथ-साथ खेलते। कभी कभी मैं कुशल को पढ़ा भी दिया करता था।

एक दिन की बात है, मैं छ्त पर पढ़ाई कर रहा था, कुशल भी मेरे साथ था। तभी शीतल आई उसे कुछ पूछ्ना था, गणित में उसे समस्या थी, वह आई और मुझसे सवाल पूछने लगी। वो सफ़ेद कमीज और लाल स्कर्ट में वाकई खूबसूरत लग रही थी। उसके पतले-पतले होंठ रस भरे और सुर्ख थे। मन तो किया कि अभी उन्हें चूम लूँ पर अंकल का उपकार मुझे रोक लेता, शीतल के पापा का बहुत अहसान था हम पर।

मैंने उसे ट्रिगनोमेट्री के सवाल करवाए। वो काफ़ी खुश थी कि उसकी परेशानी दूर हो गई। तब तक कुशल जा चुका था।

तब उसने कहा कि ज्योमेट्री में भी कुछ पूछना है। मैं बताने लगा, वो झुक कर समझने लगी।

अचानक ही मुझे जन्नत के दर्शन हुए उसके शर्ट के दो बटन खुले था और उसके मक्खन जैसे उजले दूध नजर आ रहे थे। तभी हमारी नजर मिली और मैं झेंप सा गया।

उसने पूछा- क्या हुआ?

सकपकाते हुए मैं आगे पढ़ाने लगा, शायद वो जानबूझ कर दिखाना चाहती थी और फिर से जन्नत मेरे सामने थी। इस बार मुझसे रहा नहीं गया और मैंने कहा- तुम्हारी शर्ट के बटन खुल गये हैं।

इस पर उसने कहा- गर्मी ज्यादा ही लग रही है, इसलिए खोले हैं ! पर तुम इधर क्यों देख रहे हो?

मैंने अपना पासा फ़ेंका- तुम्हारी उम्र के हिसाब से तुम्हारे वो काफ़ी बड़े हैं !

शायद वो मेरे से एक कदम आगे थी, वैसे भी बड़े शहर के बच्चे जल्दी बड़े होते हैं, तब तक मेरा लौड़ा भी जोश में आ चुका था, शायद शीतल को भी पता चल गया था, उसने कहा- क्या बड़े हैं? तुम्हारा भी तो है !

फिर हम हंस पड़े, मैंने कहा- कुछ नहीं !

कुछ समय बाद उसने कहा- जल्दी से सवाल बताओ, मुझे नहाने जाना है ! तुम्हें नहीं नहाना क्या?

मैंने छेड़ते हुए कहा- साथ नहाते हैं !

तभी ना जाने शीतल को क्या सूझा, उसने मुझे गाल पर चूम लिया। मैं अचानक हुए इस हमले से घबरा गया पर तब तक वो जा चुकी थी।

हम तीनों स्कूल-कॉलेज़ साथ ही जाते थे अंकल की कार से, कुशल अक्सर अगली सीट पर बैठता था।

उस दिन मुझे डर लग रहा था, रास्ते में पिछली सीट पर शीतल ने मुझे छेड़ना शुरू कर दिया, उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रख दिया और सहलाने लगी।

तभी मेरा खड़ा हो गया। यह उसे भी पता चल गया और वो मेरी ओर देख कर मुस्कुराने लगी। मेरी हालत खराब हो रही थी।

इस पर भी शीतल को चैन नहीं था, उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी स्कर्ट के नीचे से अपनी नग्न जांघों पर रख दिया, मेरा भी हाथ चलने लगा।

तभी कार रूक गई मेरा कॉलेज़ आ गया था, वहाँ मेरा मन नहीं लग रहा था, रह रह कर उसकी चिकनी जांघें याद आ जाती, मैं कल्पना के सागर में गोते लगाने लगा मन ही मन शीतल को चोदने लगा।

रात को शीतल पढ़ने के बहाने से ऊपर मेरे कमरे में आ गई। मेरी माँ किसी काम से नीचे गई हुई थी, उसे यह बात पता थी और उसने आते ही मुझसे पूछा- सुबह तुम्हें क्या हो गया था?

और मेरे शार्ट्स को खींचने लगी कि अन्दर क्या है मुझे देखना है।

मैंने उसे डांट दिया।

फिर धीरे से उसने कहा- आई लव यू ! और मेरे होंठों पर अपने होंठ जमा दिये।

आखिर मैं भी इन्सान हूँ, मैंने भी साथ देते हुए उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके होंठों को चूमने लगा। तब तक उसकी जीभ मेरे मुँह में जा चुकी थी और हम जिन्दगी का लुत्फ उठाने लगे। इस तरह करीब दस मिनट तक हम ऐसे ही रहे।

तब मैंने कहा- बस करो, कोई देख लेगा !

हम दोनों हाँफ रहे थे और एक दूसरे से नजर मिला नहीं पा रहे थे। उसके बाद यह चूमा-चाटी लगी ही रहती थी। कभी कभी मैं शीतल के बोबे भी दबा दिया करता था। इससे ज्यादा के लिए हमें मौका ही नहीं मिलता।

हमारे प्यार के परवान चढ़ने का वक्त आ गया था शायद !

शीतल के परिवार को शादी में जाना था पर शीतल के पेपर चल रहे थे। शीतल को हमारे परिवार के देख रेख में छोड़ के रात तक लौट आने को कह कर वकील अंकल सपरिवार कार से शादी में सम्मिलित होने चले गये। रात के आठ बजे अंकल का फोन आया कि वो लोग शायद सुबह तक आयेंगे, उनकी कार थोड़ी खराब हो गई है। सुबह मैकेनिक से सुधरवा कर ही आयेंगे।

मैं और शीतल डिनर के बाद शीतल के घर पर हॉल में बैठ कर पढ़ाई करने लगे थे। कुछ देर बाद मेरी माँ ने कहा- पढ़ाई के बाद, शीतल तुम अपने कमरे में सो जाना और रुद्र, तुम हॉल में सो जाना ! हम सो रहे हैं।

शीतल तो खुश हो गई यह सुन कर कि हम दोनों को नीचे ही सोना है।

कुछ देर पढ़ने के बाद शीतल ने कहा- चलो टी वी में कुछ देखते हैं !

यह कह कर उसने अपने बैग से एक सी डी निकाल कर चला दी। अब हम हैरी पाटर मूवी देख रहे थे।

मैंने कहा- यही देखना है तुम्हें?

शीतल ने मूवी आगे बढ़ा दी। तब एक ब्लू फ़िल्म चलने लगी। उसने बताया कि उसकी फ़्रेन्ड ने दी है।

अब हम दोनों भी जोश में आने लगे और मैंने अपने तपते होंठ शीतल के होंठों पर लगा दिए और सोफ़े पर ही बाँहो में बाँहे डाल कर रसपान करने लगे, सामने ब्लू फ़िल्म भी चल रही थी।

मैंने कहा- कुछ और भी करना है क्या?

उसने हाँ में सर हिलाया और मैं छ्त वाले दरवाजे को बंद कर आया। हमने हाल में बिस्तर लगा दिया ताकि किसी को शक ना हो और शीतल के कमरे में आ गए। शीतल ने अपनी अलमारी से चादर निकाल कर बिस्तर के बीचो बीच बिछा दिया, उसने बताया कि अब पुराना चादर साफ़ रहेगी।

सच में शीतल के दिमाग की दाद देनी होगी, एक भी सबूत नहीं छोड़ना चाहती थी।

अब हम दोनों बिस्तर पर आ गए और फ़िर से चुदासा माहौल बनाने लगे। मैंने जल्द ही उसके टाप व स्कर्ट को बदन से जुदा किया, शीतल भी कहाँ रुकने वाली थी, मैं भी अब सिर्फ़ चड्डी में रह गया था। शीतल को थोड़ी शर्म आ रही थी और उसने बत्ती बुझा दी और मैं अब शीतल के स्तनो से ब्रा के ऊपर से ही खेल रहा था।

तभी मैंने हाथ पीछे ले जा कर उसके स्तनों को ब्रा से आजाद करा दिया। अब हम लेट गए और मैंने शीतल से पूछा- कंडोम की जरुरत पड़ेगी !

उसने कहा- यह मेरा पहली बार है, बाद में गोली ले लूंगी, कुछ नहीं होगा !

मैं करवट बदल कर उसे अपने ऊपर ले आया और उसकी पैंटी नीचे सरका दी। शीतल पूरी नंगी मेरे ऊपर थी, उसका गोरा तराशा हुआ बदन हल्की रोशनी में चमक रहा था। शीतल ने मेरा अंडरवियर निकाल दिया। मैंने अब उसे नीचे आने को कहा.

अगले ही पल मैं शीतल के ऊपर था और उसकी चूत मेरे लण्ड से टकरा रही थी, मैंने कहा- मुझे तुम्हें देखना है !

और उठ कर मैंने बल्ब जला दिया। उसकी चटख लाल बुर एकदम चिकनी थी मेरा भी 6 इंच का लण्ड इसे चोदने को बेताब हुआ जा रहा था पर मैंने अपने आपको रोकते हुए उसके आमन्त्रण का इन्तज़ार करने लगा और उसके सारे बदन को चूमने लगा और साथ ही साथ उसके स्तनो से दूध निकालने की कोशिश भी जारी थी।

मेरा हाथ उसकी अनचुदी बुर तक पहुँच गया, उसकी बुर पनिया गई थी। मैं बुर के आस-पास सहलाने लगा।

अब शीतल की हालत खराब हो रही थी, कहने लगी- क्या कर रहे? अब जल्दी से कुछ करो ना !

मैंने कहा- क्या?

उसने धीरे से कहा- चोदो अब ! और मत तड़पाओ !

और मेरे चूतड़ों को अपने हाथों से चूत में दबाने लगी।

मैंने कहा- दर्द होगा !

उसने कहा- बर्दाश्त कर लूंगी।

अब मैंने बती बन्द कर दी और शीतल की बुर में अपना लौड़ा डालने की कोशिश करने लगा पर मैं असफ़ल रहा। शीतल ने मेरे लौड़े को अपने हाथों में लेकर रास्ता दिखाया, मैंने धक्का लगाया और शीतल के मुँह से चीख निकल गई। मेरा लण्ड रास्ता बना चुका था पर अभी मुश्किल से दो इंच ही गया होगा।

अबकी बार मैंने शीतल के होंठों में अपने होंठ लगाकर जोर का धक्का मारा। इस बार शीतल की चीख मुँह में ही दब कर रह गई, उसकी आँखों में आँसू आ गए थे। मेरा लण्ड पूरा अंदर था इस बात का सुकून हम दोनों को था। मैंने धीरे धीरे झटके देने शुरू कर दिये। थोड़ी देर में शीतल भी चुदासी होकर नीचे से साथ देने लगी। कुछ देर की चुदाई के बाद शीतल का बदन अकड़ने लगा और वो झड़ गई। उसने कहा- अब तुम पूरा बाहर निकाल कर डालो !

मैंने ऐसा 5-6 बार किया। अब फ़िर से शीतल का साथ मिलने लगा और मैं उसके पैरों को ऊपर की ओर मोड़ कर चोदने लगा। मैंने देखा शीतल के आँसू सूख चुके थे और वो चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। हम दोनों अब की बार एक साथ झड़े मैंने अपना पूरा गरमागरम वीर्य उसकी चूत में ही डाल दिया।

तभी मेरी नजर चादर पर पड़ी, चादर खून और वीर्य से सनी हुई थी। मैंने शीतल को दिखाया, तब उसने बताया कि ऐसा पहली बार होता ही है।

अभी रात के 12 बजने में कुछ ही मिनट रहे थे, शीतल कहने लगी- दूसरा दौर शुरू करें !

और मेरे पेट पर चढ़कर बैठ गई।

मैंने पूछा- कैसा लगा?

शीतल के गालों पर अभी भी सूखे आँसू के निशान थे पर उसने मुस्कुराते हुए बताया कि उसकी तमन्ना पूरी करके मैंने उसे अपना अहसानमंद बना दिया है। दर्द के बारे में उसने बताया कि उनकी बायो वाली मैडम जो कि बैचलर ही है ने उसे सब कुछ बताया था इसलिए वो दर्द सहने को तैयार थी। शीतल बताते हुए मुझ पर झुकने लगी पर मैंने खुद उठ कर उसे अपनी बाँहों में भर लिया। हम दोनों हाथों और पैरों से भी एक दूसरे की बाहों में थे।

शीतल मुझे चूमने लगी, होंठों पर, गालों पर ! शायद ही उसने मेरे कमर से ऊपर कहीं भी खाली छोड़ा हो।

मेरा लण्ड खड़ा होने लगा, यह बात शीतल भी समझ गई। उसने मुझे धक्का देकर लिटा दिया और खुद नीचे होकर अपना मुँह मेरे लण्ड तक ले गई और अगले ही पल बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह मेरा लण्ड चूसने लगी और हम फ़िर से चुदाई का आनंद लेने लगे।

आगे मेरी जिंदगी में क्या क्या हुआ यह मैं जल्द ही बताऊँगा आप मुझे मेल करना जरूर !

हवस भरा प्यार

मेरा नाम अयन है, यह घटना मेरे साथ सच में हुई है। यह मेरी पहली कहानी है जो मैं यहाँ लिख रहा हूँ अपने पहले प्यार का अनुभव !धैर्य से पढ़िए, यह आपके लण्ड और बुर से पानी निकाल देगी। मैं एक लड़की के साथ बहुत दिनों से ऑनलाइन बात कर रहा था, उसका नाम शीना है।

हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे, मैं चेन्नई में पढाई कर रहा था और वह बंगलौर में। वह मुझसे हर बात कर लेती थी और मैं उसके साथ।

एक दिन मैंने उसके सामने अपने प्यार का इज़हार किया और उसके लिए मेरे दिल में जो भी था मैंने उसे सब सच बता दिया। वह भी मुझ से प्यार करती थी और उसने मुझे हाँ कह दिया।

शीना :

शीना बहुत ही सुंदर लड़की है, उसकी तनाकृति 34-27-36 है, कद 5'6", गोरा रंग, मस्त होंठ, अच्छे नयन-नक्श, नए जमाने के घर की आधुनिक बेटी थी। उसे टीशर्ट पहनना पसंद है और टीशर्ट में उसके वक्ष बहुत ही सुंदर दिखते हैं, मानो वो उस शर्ट को फाड़ कर बाहर आना चाहते हों। उसकी कमर को कोई अगर देख ले तो बस देखता ही रह जायेगा। बस मस्त माल है।

मैं : मैं भी दिखने में अच्छा हूँ, मेरा कद 5'7" है, मुझे बॉडी बिल्डिंग का शौक है बचपन से, अपने ६ पैक्स पर मुझे बहुत नाज़ है और मेरा लंड 7.5" लंबा और 3" मोटा है।

हमारी मुलाक़ात और प्यार :

हम दोनों की परीक्षाएँ खत्म होने के बाद हमने मिलने की योजना बनाई और मैं उसे मिलने बंगलौर गया। वह मुझे लेने बस स्टैंड आई। जब मैंने उसे पहचाना तो मैं उसे देखता ही रह गया। वह मुझे किसी परी जैसी लग रही थी।

उस दिन हम दोनों बहुत घूमे और बहुत मस्ती की।

रात में हम दोनों एक होटल में कमरा लेकर रुक गए। कमरा बहुत सुन्दर था और दिल की आकृति का बेडरूम था। दोनों खाना खाकर बातें करते करते सो गए।

बीच रात को मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि शीना मुझे कसकर पकड़ कर सो रही थी और उसके वक्ष मेरी छाती से दब रहे थे, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैंने भी उससे कस कर पकड़ लिया, उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। तब मुझे लगा कि वह नींद में है और मैं उसके स्तनों को अपनी छाती से दबाने लगा।

मैं धीरे-धीरे उसके पेट को सहलाने लगा और अपना हाथ उसके वक्ष पर फिराने लगा, उसने तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं की। कमरे में नाइट बल्ब जला हुआ था, मैंने उसके होटों को देखा तो मेरा मन उन्हें चूमने को करने लगा। मैंने हिम्मत करके उसके होटों को अपने होटों से छूने के लिए अपना मुँह उसके मुँह से छुआ ही था कि उसने भी मुझसे चुम्बन करना शुरु कर दिया।

मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और हम बहुत देर तक चूमते रहे। मैं उसकी जीभ चूसने लगा और वो मेरे होटों को चूसे जा रही थी।

उसे चूमते हुए मैं उसके स्तन भी दबा रहा था और पेट को भी सहला रहा था। फिर मैं धीरे धीरे अपना हाथ उसकी स्कर्ट में डालने लगा तो उसने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया।

मैं कुछ देर रुक गया फिर उसका टॉप उतारने लगा। उसने मुझे नहीं रोका। अब उसके चूचे मेरे सामने उसकी ब्रा में थे, मैं उन्हें देख कर पागल हो रहा था और उन्हें ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। वह भी धीरे-धीरे मस्त होने लगी।

मेरा मन उसके चूचों को चूसने को कर रहा था तो मैं उसकी ब्रा खोलने के लिए अपने हाथ उसकी कमर पर ले गया लेकिन उसकी ब्रा में बहुत सारे हुक थे जिसमें आखरी हुक नहीं खुल रहा था, तो शीना ने यहाँ मेरी मदद की और जैसे ही उसकी ब्रा खुली, उसने मुझे कस कर गले लगा लिया।

फिर मैंने उसे लेटाया और उसके स्तनों के चारों ओर चुम्बन करने लगा, मैं उसे तड़पाना चाहता था थोड़ी देर !

और जब उसके चुचूक कड़े हो गए तो मैंने अचानक से उन्हें बहुत तेज तेज चूसना शुरु कर दिया और उन्हें हल्के-हल्के काटने लगा।

शीना भी बहुत मस्त हो चुकी थी और मेरे सर के बालों को पकड़ रही थी, उन्हें खींच रही थी। करीब दस मिनट तक मैं उन्हें चूसता रहा, मेरे लण्ड का बहुत बुरा हाल हो चुका था, वो पैन्ट फाड़ कर बाहर आना चाहता था तो मैंने शीना का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। उसने मेरे लण्ड को कस के पकड़ लिया और उसे दबाने लगी।

अब मैंने अपना हाथ फिर से शीना की स्कर्ट में डालना चाहा तो शीना ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया लेकिन इस बार उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। मैंने अपना हाथ फिर उसकी स्कर्ट में घुसा दिया और उसकी पैंटी के ऊपर से उसे सहलाने लगा, उसकी पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी। फिर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाला और उसकी योनि में ऊँगली डालने लगा। शीना तो बिल्कुल जैसे पागल ही हो गई, वो मस्त होकर सिसकारियाँ लेने लगी और इधर उधर तड़पने लगी।

अब मैं भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, मैंने धीरे धीरे अपने सारे कपड़े उतार दिए, फ़िर उसकी स्कर्ट और पैंटी एक ही झटके में उतार दी, उसकी योनि देख कर मेरे तन बदन काम वासना से जलने लगा। उसकी योनि पर बहुत हल्के-हल्के सुनहरे बाल थे। फिर में एक भूखे शेर की तरह उसकी चूत को चूसने लगा, उसमें अपनी जीभ डालने लगा, चाटने लगा, काटने लगा, शीना को अपनी जीभ से चोदने लगा। मैंने अपनी आँखें ऊपर करके देखा तो शीना अपने हाथों से अपने स्तन कसकर दबा रही थी और अपनी योनि को उठा उठा कर मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रही थी।

थोड़ी देर बाद शीना फिर से झड़ गई.....

मैंने उसका सारा पानी चाट लिया और उसकी बुर को चाट चाट कर साफ़ कर दिया। अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता था, मैंने अपना पूरा खड़ा लण्ड उसकी बूर में डालना चाहा पर जा ही नहीं रहा था, मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं शीना दर्द से चिल्लाने न लगे, आखिर मैंने कस कर एक धक्का मारा और मेरा एक इन्च लण्ड उसकी बूर में चला गया, शीना बहुत जोर से रोने लगी और चिल्लाने लगी, और लण्ड को बाहर निकालने के लिए कहने लगी।

मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होटों को चूसने लगा ताकि वो आवाज़ न करे।

थोड़ी देर मैं उसे चूमता रहा। जब मुझे लगा कि उसका दर्द कम हो गया है तो मैंने एक जोर का झटका फिर से लगा दिया। इस बार तीन इन्च लण्ड उसकी बुर में चला गया।

शीना चिल्लाना चाहती थी पर मैंने उसके होटों को अपने होटों में ले रखा था। इसी तरह 3-4 धक्के लगाने के बाद मेरा पूरा का पूरा लण्ड शीना की बुर में चला गया और उसका बहुत बुरा हाल हो गया, वो बहुत रो रही थी...

फिर कुछ देर के बाद मैंने हिलना शुरु किया और लण्ड आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद शीना भी मेरा साथ देने लगी और उसे भी बहुत मज़ा आने लगा....

15 मिनट तक मैंने शीना को बहुत प्यार से चोदा, उसके बाद मैं एक जानवर बन चुका था और पूरे जोर-शोर से उसकी चुदाई कर रहा था। शीना भी बहुत मस्ती से मुझसे चुद रही थी और बहुत आनन्द ले रही थी, अपनी गांड उठा उठा के मेरे लण्ड को अपनी बुर से खा रही थी।

इस रफ़्तार से मैंने उसे 15 मिनट तक और चोदा इस दौरान शीना तीन बार झड़ चुकी थी। जब मुझे लगा कि मैं आने वाला हूँ तो मैंने शीना से कहा- मैं आ रहा हूँ !

शीना ने भी अपनी गति बढ़ा दी और हम दोनों साथ साथ झड़ गए और मैं थक कर शीना के वक्ष पर सर रख कर उसके उपर लेट गया।

उस रात शीना और मैंने चार बार प्यार किया...

हम लोग आज भी बहुत सेक्स करते हैं...

मुझे और बहुत सी गर्लफ्रेंड मिली और मैंने सबकी बुर की प्यास अपने लण्ड के पानी सी बुझाई।

अगर इस कहानी को पढ़ कर आपके लौड़ों और बुरों से पानी निकला हो या तो मुझे जरुर बताइए।

मैं, दीदी और हमारा राज

मैं रिचा खन्ना लखनऊ से ! इस समय मैं 30 वर्ष की शादीशुदा महिला हूँ। मेरा यौन जीवन भी काफ़ी स्वछन्द रहा है। मैं जब 18 साल की थी और बारहवीं में पढ़ती थी तब मैंने अपने प्रथम सहवास का आनन्द लिया था।
वही घटना मैं आपको आगे बताने जा रही हूँ।

हमारे परिवार में सिर्फ़ चार लोग थे, मैं, मेरी बड़ी बहन सुनीता और मेरे मम्मी-पापा। हमारे घर में एक ड्राइंग रूम और दो बेडरूम थे। एक बेडरूम में मम्मी-पापा और दूसरे में हम दोनों बहनें सोती थी। इसके अलावा ऊपर की मंजिल पर एक कमरा था जिसमें राज रहा करता था।

पापा सुनील खन्ना सरकारी नौकरी में थे और मम्मी सविता खन्ना भी एक स्कूल में अध्यापन कार्य करती थी। उस समय हम पुणे(महाराष्ट्र) में रहते थे। हम चारों के अतिरिक्त एक सजीला युवक राज हमारे घर में घर के सभी काम करने के लिए रहता था। राज पूरा दिन घर में रह कर सारा काम करता था।

एक दिन मैं स्कूल से ग्यारह बजे ही आ गई और सीधे अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने देखा कि सुनीता राज के साथ कमरे में थी, दोनों पूरे नंगे थे, राज बेड पर लेटा था और सुनीता उसके ऊपर बैठ कर आगे की ओर झुकी हुई धीरे धीरे हिल रही थी, राज के मुँह में सुनीता का एक चुचूक था। दोनों में से किसी ने मुझे नहीं देखा पर मेरे मुख से चीख सी निकली- सुनीता, यह क्या हो रहा है?

और मैं वहाँ से सीधे मम्मी-पापा के कमरे में भाग आई। मैंने देखा ही नहीं कि मेरे चीखने के बाद उन दोनों ने क्या किया।

कोई पांच मिनट बाद वो दोनों मेरे पास आए और सुनीता मेरे सामने बैठ कर मेरे कन्धों पर अपने दोनों हाथ रख कर मुझे कहने लगी- देख रिचा, तूने जो भी देखा, मम्मी को मत बताना !

राज मेरे पीछे बैठ गया और मेरी पीठ पर हाथ रख कर सहलाने लगा। उस समय सुनीता ने सिर्फ़ टॉप और पैंटी और सुनील ने सिर्फ़ अन्डरवीयर पहना था। सुनीता की गोरी नंगी जांघें मेरे सामने थी और उसे देख कर मेरे मन में कुछ कुछ होने लगा था।

सुनीता मुझे मनाते मनाते अपने हाथ मेरे गालों पर ले आई और उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। इससे पहले मुझे ऐसा कोई अनुभव नहीं था, मुझे सुनीता का चुम्बन बहुत भाया और मेरे बदन में आग सी भर गई।

राज मेरी पीठ सहलाते सहलाते अपने हाथ मेरे वक्ष पर ले आया और धीरे धीरे मेरी चूचियाँ सहलाने लगा। मुझे यह सब काफ़ी अजीब सा लग रहा था लेकिन मज़ा भी आ रहा था। सुनीता ने चूमते चूमते मुझे पीछे की तरफ़ झुका कर राज के ऊपर गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरा कमीज ऊपर उठा कर मेरी चूचियों पर ब्रा के ऊपर ही अपने होंठ रगड़ने लगी।

पीछे से राज ने धीरे धीरे मेरा कमीज ऊपर सरका कर उसे मेरे गले से निकाल कर मेरे बदन से बिल्कुल जुदा कर दिया। मैं चाह कर भी उन दोनों का विरोध नहीं कर पा रही थी। कमीज़ उतरने के बाद सुनीता मे मेरी एक चूची मेरी ब्रा से बाहर खींच ली और चूसने लगी।

इसी बीच राज ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा भी मेरी चूचियों का साथ छोड़ कर एक तरफ़ पड़ी मेरा मुँह चिड़ा रही थी। इसके बाद राज के हाथ मेरी चूचियों को मसलने लगे और सुनीता कई उंगलियाँ मेरी सलवार के नाड़े तक पहुंच चुकी थी।

राज मेरी कमर के नीचे से निकल कर मेरे ऊपर झुक गया और मेरे होंठ उसके होंठों की गिरफ़्त में आ गए। वो मुझे पूरे जोर से चूम-चाट रहा था। सुनीता मेरी सलवार मेरी टांगों से अलग करने में लगी थी। राज मुझे चूमते चूमते मेरी चुचूक को चूसने लगा और दूसरी चूची को मसलने लगा। अब चूंकि मेरा चेहरा राज की जांघों के पास था तो मुझे उसकी जांघों के बीच से उसके पसीने, वीर्य और पेशाब की सी मिलीजुली गन्ध आ रही थी जिससे मुझे और ज्यादा उत्तेजना होने लगी। मेरे मन में यह विचार भी आ रहा था कि मैं इनका विरोध क्यों नहीं कर रही हूँ।

सुनीता मेरी सलवार उतारने के बाद मेरी गोरी, नर्म, मक्खन सी जांघों को चूम रही थी और जीभ से चाट भी रही थी। मेरी योनि से जैसे रिसाव सा हो रहा था बिल्कुल वैसा महसूस हो रहा था जैसे मासिक धर्म में होता है। मैं बिल्कुल बेजान गुड़िया की भान्ति बिस्तर पर पड़ी थी और राज और सुनीता मेरे बदन से मनचाहे ढंग से खेल रहे थे, पैंटी के अतिरिक्त मेरे शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था।

राज मेरी चूचियों को चूसते चूसते मेरे नंगे पेट की और बढ़ा और मेरी नाभि छिद्र में अपनी जीभ घुसा दी। उसका एक हाथ पैंटी के ऊपर से ही मेरी योनि का जायजा लेने लगा था। अब सुनीता ने मेरे बदन को पूर्णतया राज के हवाले कर दिया और उसने बिस्तर से उठ कर राज के अन्डरवीयर को उसकी टांगों से सरका कर उतार दिया। राज का उत्थित लिंग मेरे गालों पर टकरा रहा था और उसकी गंध मुझे कभी अच्छी लगती तो कभी बुरी।

सुनीता ने राज के लिंग को अपने हाथ में लिया और उसे मेरे गालों, होंठों पर रगड़ने लगी। जब लिंग गालों पर आता तो मुझे बहुत अच्छा लगता लेकिन जब होंठों पर आता तो मुझे घिन सी होती और मैं उससे बचने की कोशिश में अपना चेहरा इधर-उधर घुमाने लगती। उधर राज का एक हाथ मेरी पैंटी सुरक्षा को तोड़ते हुए उसके अन्दर घुस चुका था और दूसरा हाथ मेरी पैंटी को सरकाने की जी तोड़ कोशिश में लगा था लेकिन मेरे भारी कूल्हों के नीचे मेरी पैंटी दबी होने के कारण उसे सफ़लता नहीं मिल रही थी।

तभी राज ने जबरन मेरी टांगें ऊपर हवा में उठाई और एक ही झटके से मेरी पैंटी मेरे टखनों तक सरका दी। मेरी चूत के आसपास छोटे छोटे मखमली बाल थे क्योंकि एक हफ़्ते पहले ही मैंने हेयर रिमूवर प्रयोग किया था। अब राज ने अपने होंठ मेरी अनछुई चूत के द्वार पर रखे और अपनी जीभ अन्दर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा।

सुनीता अब राज के लण्ड का अग्र भाग मेरे स्तनाग्रों पर रगड़ रही थी और बीच बीच में कभी लण्ड तो कभी मेरे चुचूक चूस लेती। उत्तेजना के मारे मेरे कूल्हे अपने आप उछल उछल कर मेरी योनि को राज के मुख पर पटक रहे थे। राज और सुनीता दोनों समझ चुके थे कि अब मैं चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ।

सुनीता ने राज से कहा- राज ! चोद दे साली को ! खोल दे इसकी चूत ! इसे भी दिखा दे कि चुदने में कितना मज़ा है।

राज मेरे ऊपर से उठा, मेरी जांघों के बीच आया, सुनीता ने मेरी एक टांग पकड़ी, दूसरे हाथ से राज का लण्ड पकड़ कर मेरी योनि-छिद्र पर लगाया और बोली- लगा धक्का राज !

और मेरी चीख निकल गई- हाय मम्मी ! मर गई मैं !

इतने में सुनीता का हाथ मेरे मुँह पर जम गया और मेरी आवाज घुट कर रह गई।

बस उसके बाद वही सब ! धीरे धीरे मेरा दर्द गायब होने लगा, मुझे मज़ा आने लगा और राज धक्के पर धक्का लगाने लगा।

जब राज का छुटने को था तो सुनीता पहले ही बोल पड़ी- राज, अन्दर मत करना !

काफ़ी देर लगी राज को छुटने में !

जैसे ही राज मेरी चूत से अपना लौड़ा निकाल कर मुठ मारने लगा, सुनीता ने मेरी चूत से निकले खून से सने राज के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी। राज सुनीता दीदी के मुँह के अन्दर ही झड़ गया।

इसके बाद काफ़ी देर हम ऐसे ही लेटे रहे और फ़िर सुनीता ने राज से एक बार अपनी चुदाई कराई हालांकि राज की बिल्कुल इच्छा नहीं थी और ना ही उसमें तीसरी चुदाई की हिम्मत थी।

मैं इस सत्यकथा पर आपके विचार जानना चाहती हूँ !

Thursday, 20 March 2014

चालीस की उम्र

मैं अपनी चालीस की उम्र पार कर चुकी थी। पर तन का सुख मुझे बस चार-पांच साल
ही मिला। मैं चौबीस वर्ष की ही थी कि मेरे पति एक बस दुर्घटना में चल बसे थे।
मेरी बेटी की शादी मैंने उसके अठारह वर्ष होते ही कर दी थी। अब मुझे बहुत
अकेलापन लगता था।
पड़ोसी सविता का जवान लड़का मोनू अधिकतर मेरे यहाँ कम्प्यूटर पर काम करने आता
था। कभी कभी तो उसे काम करते करते बारह तक बज जाते थे। वो मेरी बेटी वर्षा के
कमरे में ही काम करता था। मेरा कमरा पीछे वाला था ... मैं तो दस बजे ही सोने
चली जाती थी।
एक बार रात को सेक्स की बचैनी के कारण मुझे नींद नही आ रही थी व इधर उधर
करवटें बदल रही थी। मैंने अपना पेटीकोट ऊपर कर रखा था और चूत को हौले हौले
सहला रही थी। कभी कभी अपने चुचूकों को भी मसल देती थी। मुझे लगा कि बिना
अंगुली घुसाये चैन नहीं आयेगा। सो मैं कमरे से बाहर निकल आई।


मोनू अभी तक कम्प्यूटर पर काम कर रहा था। मैंने बस यूं ही जिज्ञासावश खिड़की
से झांक लिया। मुझे झटका सा लगा। वो इन्टरनेट पर लड़कियों की नंगी तस्वीरें
देख रहा था। मैं भी उस समय हीट में थी, मैं शान्ति से खिड़की पर खड़ी हो गई और
उसकी हरकतें देखने लग गई। उसका हाथ पजामे के ऊपर लण्ड पर था और धीरे धीरे उसे
मल रहा था।

ये सब देख कर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मेरे हाथ अनायास ही चूत पर चले गये, और
सहलाने लग गये। कुछ ही समय में उसने पजामा नीचे सरका कर अपना नंगा लण्ड बाहर
निकाल लिया और सुपाड़ा खोल कर मुठ मारने लगा। मन कह रहा था कि तेरी प्यासी
आंटी चुदवाने को तैयार है, मुठ काहे मारता है?

तभी उसका वीर्य निकल पड़ा और उसने अपने रूमाल से लण्ड साफ़ कर लिया। अब वो
कम्प्यूटर बंद करके घर जाने की तैयारी कर रहा था। मैं फ़ुर्ती से लपक कर अपने
कमरे में चली आई। उसने कमरा बन्द किया और बाहर चला गया।

उसके जाते ही मेरे खाली दिमाग में सेक्स उभर आया। मेरा जिस्म जैसे तड़पने लगा।
मैंने जैसे तैसे बाथरूम में जा कर चूत में अंगुली डाल कर अपनी अग्नि शान्त
की। पर दिल में मोनू का लण्ड मेरी नजरों के सामने से नहीं हट पा रहा था। सपने
में भी मैंने उसके लण्ड को चूस लिया था। अब मोनू को देख कर मेरे मन में वासना
जागने लगी थी। मुझे लगा कि सोनू को भी कोई लड़की चोदने के लिये नहीं मिल रही
है, इसीलिये वो ये सब करता है। मतलब उसे पटाया जा सकता है। सुबह तक उसका लण्ड
मेरे मन में छाया रहा। मैंने सोच लिया था कि यूं ही जलते रहने से तो अच्छा है
कि उसे जैसे तैसे पटा कर चुदवा लिया जाये, बस अगर रास्ता खुल गया तो मजे ही
मजे हैं।

मोनू सवेरे ही आ गया था। वो सीधे कम्प्यूटर पर गया और उसने कुछ किया और जाने
लगा। मैंने उसे चाय के लिये रोक लिया। चाय के बहाने मैंने उसे अपने सुडौल
वक्ष के दर्शन करा दिये। मुझे लगा कि उसकी नजरें मेरे स्तनों पर जम सी गई थी।
मैंने उसके सामने अपने गोल गोल चूतड़ों को भी घुमा कर उसका ध्यान अपनी ओर
खींचने की कोशिश की और मुझे लगा कि मुझे उसे आकर्षित में सफ़लता मिल रही है।
मन ही मन में मैं हंसी कि ये लड़के भी कितने फ़िसलपट्टू होते हैं। मेरा दिल बाग
बाग हो गया। लगा कि मुझे सफ़लता जल्दी ही मिल जायेगी।

मेरा अन्दाजा सही निकला। दिन में आराम करने के समय वो चुपके से आ गया और मेरी
खिड़की से झांक कर देखा। उसकी आहट पा कर मैं अपना पेटीकोट पांवों से ऊपर
जांघों तक खींच कर लेट गई। मेरे चिकने उघाड़े जिस्म को वो आंखे फ़ाड़-फ़ाड़ कर
देखता रहा, फिर वो कम्प्यूटर के कमरे में आ गया। ये सब देख कर मुझे लगा
चिड़िया जाल में उलझ चुकी है, बस फ़न्दा कसना बाकी है।

रात को मैं बेसब्री से उसका इन्तज़ार करती रही। आशा के अनुरूप वो जल्दी ही आ
गया। मैं कम्प्यूटर के पास बिस्तर पर यूँ ही उल्टी लेटी हुई एक किताब खोल कर
पढने का बहाना करने लगी। मैंने पेटीकोट भी पीछे से जांघो तक उठा दिया था।
ढीले से ब्लाऊज में से मेरे स्तन झूलने लगे और उसे साफ़ दिखने लगे। ये सब करते
हुये मेरा दिल धड़क भी रहा था, पर वासना का जोर मन में अधिक था।

मैंने देखा उसका मन कम्प्यूटर में बिलकुल नहीं था, बस मेरे झूलते हुये सुघड़
स्तनों को घूर रहा था। उसका पजामा भी लण्ड के तन जाने से उठ चुका था। उसके
लण्ड की तड़प साफ़ नजर आ रही थी। उसे गर्म जान कर मैंने प्रहार कर ही दिया।

"क्या देख रहे हो मोनू...?"

"आं ... हां ... कुछ नहीं रीता आण्टी... !" उसके चेहरे पर पसीना आ गया था।

"झूठ... मुझे पता है कि तुम ये किताब देख रहे थे ना ......?" उसके चेहरे की
चमक में वासना साफ़ नजर आ रही थी।

वो कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और मेरे पास बिस्तर के नजदीक आ गया।

"आण्टी, आप बहुत अच्छी हैं, एक बात कहूँ ! आप को प्यार करने का मन कर रहा
है।" उसके स्वर में प्यार भरी वासना थी।

मैंने उसे अपना सर घुमा कर देखा,"आण्टी हूँ मैं तेरी, कर ले प्यार, इसमे
शर्माना क्या..."

वो धीरे से मेरी पीठ पर सवार हो गया और पीछे से लिपट पड़ा। उसकी कमर मेरे
नितम्बो से सट गई। उसका लण्ड मेरे कोमल चूतड़ों में घुस गया। उसके हाथ मेरे
सीने पर पहुंच गये। पीछे से ही मेरे गालों को चूमने लगा। भोला कबूतर जाल में
उलझ कर तड़प रहा था। मुझे लगा कि जैसे मैंने कोई गढ़ जीत लिया हो।
मैंने अपनी टांगें और चौड़ी कर ली, उसका लण्ड गाण्ड में फ़िट करने की उसे
मनमानी करने में सहायता करने लगी।

"बस बस, बहुत हो गया प्यार ... अब हट जा..." मेरा दिल खुशी से बाग बाग हो गया
था।

"नहीं रीता आण्टी, बस थोड़ी सी देर और..." उसने कुत्ते की भांति अपने लण्ड को
और गहराई में घुसाने की कोशिश की। मेरी गाण्ड का छेद भी उसके लण्ड को छू गया।
उसके हाथ मेरी झूलती हुई चूंचियों को मसलने लगे, उसकी सांसें तेज हो गई थी।
मेरी सांसे भी धौकनीं की तरह चलने लगी थी। दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। लगा
कि मुझे चोद ही डालेगा।

"बस ना... मोनू ...तू तो जाने क्या करने लगा है ...ऐसे कोई प्यार किया जाता
है क्या ? ...चल हट अब !" मैंने प्यार भरी झिड़की दी उसे। वास्तव में मेरी
इच्छा थी कि बस वो मुझे पर ऐसे ही चढ़ा रहे और अब मुझे चोद दे... मेरी झिड़की
सुन कर वो मेरी पीठ पर से उतर गया। उसके लण्ड का बुरा हाल था। इधर मेरी
चूंचियां, निपल सभी कड़क गये थे, फ़ूल कर कठोर हो गये थे।

"तू तो मेरे से ऐसे लिपट गया कि जैसे मुझे बहुत प्यार करता है ?"

"हां सच आण्टी ... बहुत प्यार करता हूँ..."

"तो इतने दिनों तक तूने बताया क्यों नहीं?"

"वो मेरी हिम्मत नहीं हुई थी..."उसने शरमा कर कहा।

"कोई बात नहीं ... चल अब ठीक से मेरे गाल पर प्यार कर... बस... आजा !" मैं
उसे अधिक सोचने का मौका नहीं देना चाहती थी।

उसने फिर से मुझे जकड़ सा लिया और मेरे गालों को चूमने लगा। तभी उसके होंठ
मेरे होठों से चिपक गये। उसने अपना लण्ड उभार कर मेरी चूत से चिपका दिया।

मेरे दिल के तार झनझना गये। जैसे बाग में बहार आ गई। मन डोल उठा। मेरी चूत भी
उभर कर उसके लण्ड का उभार को स्पर्श करने लगी। मैंने उसकी उत्तेजना और बढ़ाने
के लिये उसे अब परे धकेल दिया। वो हांफ़ता सा दो कदम दूर हट गया।

मुझे पूर्ण विश्वास था कि अब वो मेरी कैद में था।

"मोनू, मैं अब सोने जा रही हूं, तू भी अपना काम करके चले जाना !" मैंने उसे
मुस्करा कर देखा और कमरे के बाहर चल दी। इस बार मेरी चाल में बला की लचक आ गई
थी, जो जवानी में हुआ करती थी।

कमरे में आकर मैंने अपनी दोनों चूंचियाँ दबाई और आह भरने लगी। पेटीकोट में
हाथ डाल कर चूत दबा ली और लेट गई। तभी मेरे कमरे में मोनू आ गया। इस बार वो
पूरा नंगा था। मैं झट से बिस्तर से उतरी और उसके पास चली आई।

"अरे तूने कपड़े क्यों उतार दिये...?"

"आ...आ... आण्टी ... मुझे और प्यार करो ..."

"हां हां, क्यों नहीं ... पर कपड़े...?"

"आण्टी... प्लीज आप भी ये ब्लाऊज उतार दो, ये पेटीकोट उतार दो।" उसकी आवाज
जैसे लड़खड़ा रही थी।

"अरे नहीं रे ... ऐसे ही प्यार कर ले !"

उसने मेरी बांह पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया और मुझसे लिपट गया।

"आण्टी ... प्लीज ... मैं आपको ... आपको ... अह्ह्ह्ह्... चोदना चाहता हूं !"
वो अपने होश खो बैठा था।

"मोनू बेटा, क्या कह रहा है ..." उसके बावलेपन का फ़ायदा उठाते हुये मैंने
उसका तना हुआ लण्ड पकड़ लिया।

"आह रीता आण्टी ... मजा आ गया ... इसे छोड़ना नहीं ... कस लो मुठ्ठी में
इसे..."

उसने अपने हाथ मेरे गले में डाल दिये और लण्ड को मेरी तरफ़ उभार दिया।

मैंने उसका कड़क लण्ड पकड़ लिया। मेरे दिल को बहुत सुकून पहुंचा। आखिर मैंने
उसे फ़ंसा ही लिया। बस अब उसकी मदमस्त जवानी का मजा उठाना था। बरसों बाद मेरी
सूनी जिंदगी में बहार आई थी। मैंने दूसरे हाथ से अपना पेटीकोट का नाड़ा ढीला
कर दिया, वह जाने कब नीचे सरक गया। मैंने मोनू को बिस्तर के पास ही खड़ा कर
दिया और खुद बिस्तर पर बैठ गई। अब उसका लौड़ा मैंने फिर से मुठ्ठी में भरा और
उसे आगे पीछे करके मुठ मारने लगी। वो जैसे चीखने सा लगा। अपना लण्ड जोर जोर
से हाथ में मारने लगा। तभी मैंने उसे अपने मुख में ले लिया। उसकी उत्तेजना
बढ़ती गई। मेरे मुख मर्दन और मुठ मारने पर उसे बहुत मजा आ रहा था। तभी उसने
अपना वीर्य उगल दिया। जवानी का ताजा वीर्य ...

सुन्दर लण्ड का माल ... लाल सुपाड़े का रस ... किसे नसीब होता है ... मेरे मुख
में पिचकारियां भरने लगी। पहली रति क्रिया का वीर्य ... ढेर सारा ... मुँह
में ... हाय ... स्वाद भरा... गले में उतरता चला गया। अन्त में जोर जोर से
चूस कर पूरा ही निकाल लिया।

सब कुछ शान्त हो गया। उसने शरम के मारे अपना चेहरा हाथों में छिपा लिया।

मैंने भी ये देख कर अपना चेहरा भी छुपा लिया।

"आण्टी... सॉरी ... मुझे माफ़ कर देना ... मुझे जाने क्या हो गया था।" उसने
प्यार से मेरे बालों में हाथ फ़ेरते हुये कहा।

मैं उसके पास ही बैठ गई। अपने फ़ांसे हुये शिकार को प्यार से निहारने लगी।

"मोनू, तेरा लण्ड तो बहुत करारा है रे...!"

"आण्टी ... फिर आपने उसे भी प्यार किया... आई लव यू आण्टी!"

मैंने उसका लण्ड फिर से हाथ में ले लिया।

"बस आंटी, अब मुझे जाने दीजिये... कल फिर आऊंगा" उसे ये सब करने से शायद शर्म
सी लग रही थी।

वो उठ कर जाने लगा, मैं जल्दी से उठ खड़ी हुई और दरवाजे के पास जा खड़ी हुई और
उसे प्यार भरी नजरों से देखने लगी। उसने मेरी चूत और जिस्म को एक बार निहारा
और कहा,"एक बार प्यार कर लो ... आप को यूँ छोड़ कर जाने को मन नहीं कर रहा !"

मैंने अपनी नजरें झुका ली और पास में रखा तौलिया अपने ऊपर डाल लिया। उसका
लण्ड एक बार फिर से कड़क होने लगा। वो मेरे नजदीक आ गया और मेरी पीठ से चिपक
गया। उसका बलिष्ठ लण्ड मेरी चूतड़ की दरारों में फ़ंसने लगा। इस बार उसके भारी
लण्ड ने मुझ पर असर किया... उसके हाथों ने मेरी चूंचियां सम्भाल ली और उसका
मर्दन करने लगे। अब वह मुझे एक पूर्ण मर्द सा नजर आने लगा था। मेरा तौलिया
छूट कर जमीन पर गिर पड़ा।

"क्या कर रहे हो मोनू..."

"वही जो ब्ल्यू फ़िल्म में होता है ... आपकी गाण्ड मारना चाहता हू ... फिर चूत
भी..."

"नहीं मोनू, मैं तेरी आण्टी हू ना ..."

"आण्टी, सच कहो, आपका मन भी तो चुदने को कर रहा है ना?"

"हाय रे, कैसे कहूँ ... जन्मों से नहीं चुदी हूँ... पर प्लीज आज मुझे छोड़
दे..."

"और मेरे लण्ड का क्या होगा ... प्लीज " और उसका लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद
में दबाव डाल दिया।

"सच में चोदेगा... ? हाय ... रुक तो ... वो क्रीम लगा दे पहले, वर्ना मेरी
गाण्ड फ़ट जायेगी !"

उसने क्रीम मेरी गाण्ड के छेद में लगा दी और अंगुली गाण्ड में चलाने लगा।
मुझे तेज खुजली सी हुई।

"मार दे ना अब ... खुजली हो रही है।"

मोनू ने लण्ड दरार में घुसा कर छेद तक पहुंचा दिया और मेरा छेद उसके लण्ड के
दबाव से खुलने लगा और फ़क से अन्दर घुस पड़ा।

"आह मेरे मोनू ... गया रे भीतर ... अब चोद दे बस !"

मोनू ने एक बार फिर से मेरे उभरे हुये गोरे गोरे स्तनों को भींच लिया। मेरे
मुख से आनन्द भरी चीख निकल गई। मैंने झुक कर मेज़ पर हाथ रख लिया और अपनी
टांगें और चौड़ा दी। मेरी चिकनी गाण्ड के बीच उसका लण्ड अन्दर-बाहर होने लगा।
चुदना बड़ा आसान सा और मनमोहक सा लग रहा था। वो मेरी कभी चूंचियां निचोड़ता तो
कभी मेरी गोरी गोरी गाण्ड पर जोर जोर से हाथ मारता।

उसक सुपाड़ा मेरी गाण्ड के छेद की चमड़ी को बाहर तक खींच देता था और फिर से
अन्दर घुस जाता था। वो मेरी पीठ को हाथ से रगड़ रगड़ कर और रोमांचित कर रहा था।
उसका सोलिड लण्ड तेजी से मेरी गाण्ड मार रहा था। कभी मेरी पनीली चूत में अपनी
अंगुली घुसा देता था। मैं आनन्द से निहाल हो चुकी थी। तभी मुझे लगा कि मोनू
कहीं झड़ न जाये। पर एक बार वो झड़ चुका था, इसलिये उम्मीद थी कि दूसरी बार देर
से झड़ेगा, फिर भी मैंने उसे चूत का रास्ता दिखा दिया।

"मोनू, बस मेरी गाण्ड को मजा गया, अब मेरी चूत मार दो ..." उसके चहरे पर
पसीना छलक आया था। उसे बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी। उसने एक झटके से अपना लण्ड
बाहर खींच लिया। मैंने मुड़ कर देखा तो उसका लण्ड फ़ूल कर लम्बा और मोटा हो
चुका था। उसे देखते ही मेरी चूत उसे खाने के लिये लपलपा उठी।

"मोनू मार दे मेरी चूत ... हाय कितना मदमस्त हो रहा है ... दैय्या रे !"

"आन्टी, जरा पकड़ कर सेट कर दो..." उसकी सांसें जैसे उखड़ रही थी, वो बुरी तरह
हांफ़ने लगा था, उसके विपरीत मुझे तो बस चुदवाना था। तभी मेरे मुख से आनन्द
भरी सीत्कार निकल गई। मेरे बिना सेट किये ही उसका लण्ड चूत में प्रवेश कर गया
था। उसने मेरे बाल खींच कर मुझे अपने से और कस कर चिपटा लिया और मेरी चूत पर
लण्ड जोर जोर से मारने लगा। बालों के खींचने से मैं दर्द से बिलबिला उठी। मैं
छिटक कर उससे अलग हो गई। उसे मैंने धक्का दे कर बिस्तर पर गिरा दिया और उससे
जोंक की तरह उस पर चढ़ कर चिपक गई। उसके कड़कते लण्ड की धार पर मैंने अपनी
प्यासी चूत रख दी और जैसे चाकू मेरे शरीर में उतरता चला गया। उसके बाल पकड़ कर
मैंने जोर लगाया और उसका लण्ड मेरी बच्चेदानी से जा टकराया। उसने मदहोशी में
मेरी चूंचियां जैसे निचोड़ कर रख दी। मैं दर्द से एक बार फिर चीख उठी और चूत
को उसके लण्ड पर बेतहाशा पटकने लगी। मेरी अदम्य वासना प्रचण्ड रूप में थी।
मेरे हाथ भी उसे नोंच खसोट रहे थे, वो आनन्द के मारे निहाल हो रहा था, अपने
दांत भींच कर अपने चूतड़ ऊपर की ओर जोर-जोर से मार रहा था।

"मां कसम, मोनू चोद मेरे भोसड़े को ... साले का कीमा बना दे ... रण्डी बना दे
मुझे... !"

"पटक, हरामजादी ... चूत पटक ... मेरा लौड़ा ... आह रे ... आण्टी..." मोनू भी
वासना के शिकंजे में जकड़ा हुआ था। हम दोनों की चुदाई रफ़्तार पकड़ चुकी थी।
मेरे बाल मेरे चेहरे पर उलझ से गये थे। मेरी चूत उसके लण्ड को जैसे खा जाना
चाहती हो। सालों बाद चूत को लण्ड मिला था, भला कैसे छोड़ देती !

वो भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल रहा था, जबरदस्त ताकत थी उसमें, मेरी चूत में
जोर की मिठास भरी जा रही थी। तभी जैसे आग का भभका सा आया ... मैंने अपनी चूत
का पूरा जोर लण्ड पर लगा दिया... लण्ड चूत की गहराई में जोर से गड़ने लगा...
तभी चूत कसने और ढीली होने लगी। लगा मैं गई... उधर इस दबाव से मोनू भी चीख
उठा और उसने भी अपने लण्ड को जोर से चूत में भींच दिया। उसका वीर्य निकल पड़ा
था। मैं भी झड़ रही थी। जैसे ठण्डा पानी सा हम दोनों को नहला गया। हम दोनों एक
दूसरे से जकड़े हुये झड़ रहे थे। हम तेज सांसें भर रहे थे। हम दोनों का शरीर
पसीने में भीग गया था। उसने मुझे धीरे से साईड में करके अपने नीचे दबा लिया
और मुझे दबा कर चूमने लगा। मैं बेसुध सी टांगें चौड़ी करके उसके चुम्बन का
जवाब दे रही थी। मेरा मन शान्त हो चुका था। मैं भी प्यार में भर कर उसे चूमने
लगी थी। लेकिन हाय रे ! जवानी का क्या दोष ... उसका लण्ड जाने कब कड़ा हो गया
था और चूत में घुस गया था, वो फिर से मुझे चोदने लगा था।

मैं निढाल सी चुदती रही ... पता नहीं कब वो झड़ गया था। तब तक मेरी उत्तेजना
भी वासना के रूप में मुझ छा गई थी। मुझे लगा कि मुझे अब और चुदना चाहिये कि
तभी एक बार फिर उसका लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। मैंने उसे
आश्चर्य से देखा और चुदती रही। कुछ देर में हम दोनों झड़ गये। मुझे अब कमजोरी
आने लगी थी। मुझ पर नींद का साया मण्डराने लगा था। आंखें थकान के मारे बंद
हुई जा रही थी, कि मुझे चूत में फिर से अंगारा सा घुसता महसूस हुआ।

"मोनू, बस अब छो ... छोड़ दे... कल करेंगे ...!" पर मुझे नहीं पता चला कि उसने
मुझे कब तक चोदा, मैं गहरी नींद में चली गई थी।

सुबह उठी तो मेरा बदन दर्द कर रहा था। भयानक कमजोरी आने लगी थी। मैं उठ कर
बैठ गई, देखा तो मेरे बिस्तर पर वीर्य और खून के दाग थे। मेरी चूत पर खून की
पपड़ी जम गई थी। उठते ही चूत में दर्द हुआ। गाण्ड भी चुदने के कारण दर्द कर
रही थी। मोनू बिस्तर पर पसरा हुआ था। उसके शरीर पर मेरे नाखूनों की खरोंचे
थी। मैं गरम पानी से नहाई तब मुझे कुछ ठीक लगा। मैंने एक एण्टी सेप्टिक क्रीम
चूत और गाण्ड में मल ली।

मैंने किचन में आकर दो गिलास दूध पिया और एक गिलास मोनू के लिये ले आई।

मेरी काम-पिपासा शान्त हो चुकी थी, मोनू ने मुझे अच्छी तरह चोद दिया था। कुछ
ही देर में मोनू जाग गया, उसको भी बहुत कमजोरी आ रही थी। मैंने उसे दूध पिला
दिया। उसके जिस्म की खरोंचों पर मैंने दवाई लगा दी थी। शाम तक उसे बुखार हो
आया था। शायद उसने अति कर दी थी...।